कामयाबी का तभी "सिंहासन" होगा,जब आपका अपने "मन" पर शासन होगा।
तूफानों से आँख मिलाओ सैलाबों पे वार करोमल्लाहों का चक्कर छोड़ो तैर के दरिया पार करो
~ डॉ. राहत इंदौरी
ख्वाब टूटें हैं मगर हौसले जिंदा हैं... हम वो हैं जहां मुश्किलें शर्मिंदा हैं....!!
ला "श्रंगार" कर दूं तेरा अपनी "मोहब्बत" से,कहीं मैं भी तेरी "मांग" पर "सिंदूर" हो जाऊं..!!
जिसके लिए थे हम बहुत खासउसी ने बना दिया ज़िंदा लाश…!!
रंग बदलती इस दुनिया में...
मुझे अपने बेरंग होने से...शिकायत न रही....
न्यूज़ देख रहा था
ना मुझे इजराइल से बैर है
ना फलीस्तीन से मोहब्बत
दोनो तरफ से मरने वालों की
संख्या बताई जा रही थी
जिसमे औरते मर्द मासूम थे
टूटते घर थे
कुछ लाशें थी
कहीं आग लगी थी
कहीं रुदन था...
बहुत खूबसूरत लग रही थी वोलेकिन माथे पर सिंदूर था ।।
उबाऊ से दिन, अज्ञात भविष्य और अनियमित नींद, दिन बीतते जाते हैं और कुछ भी नया नहीं होता…!!!
कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तिरा ख़याल भी
दिल को ख़ुशी के साथ साथ होता रहा मलाल भी
भूख से डगमगा रहें हैं पांव
और बाज़ार से गुजरना है.....!!
वफ़ा करेंगे निबाहेंगे बात मानेंगेतुम्हें याद है कुछ ये शब्द किस के थे.!
कुछ कश्तियाँ डूबी है, अपने सूराखों की वजह से भी,
यूँ हर बार इल्ज़ाम,, तूफानों पर न लगाया करो।।
सेजल
टमाटर का भाव खाना एक बार समझ आता हैं, लेकिन अदरक शक्ल ना सूरत फिर भी 200 रू किलो...शायद इसलिए ही इसे कूटा जाता है..
तू जहां तक दिखाई देता है..
उसके आगे मैं देखता ही नहीं..
समाज को इतना भी सभ्य नही होना चाहिए,कि प्रेम करता हुआ कबूतरों का जोड़ा लोगों को असभ्य लगे
मर्दों ने युद्ध जीते, धरती जीती, समुद्र जीता, आसमान जीता...
औरतों ने मेकअप किया और मर्द को ही जीत लिया...
अहंकार की...सबसे बड़ी खराबी यही है कि...यह कभी भी इन्सान को..महसूस नहीं होने देता कि... वह गलत है...
खुद को श्रेष्ठ खुद नही, औरों को करने दो
खुद कहोगे तो मान नही अभिमान झलकेगा।
गुलामी के दावत से बेहतर हैं,
आज़ादी की सुखी रोटी...