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World's Best Cow Hospital

मुझसे ही क्यो पूछते हो सब, उनके बारे में, कभी उनसे भी पूछ लिया करो, मेरे बारे में...

संघर्षों की समर भूमि में, हमसे पूछो हम कैसे हैं, कालचक्र के चक्रव्यूह में, हम भी अभिमन्यु जैसे हैं !

दोनों ही पक्ष आए हैं तैयारियों के साथ हम गर्दनों के साथ हैं वो आरियों के साथ

हमें प्रेम करना चाहिए, न कि प्रेम में गिरना चाहिए,क्योंकि जो कुछ भी गिरता है, वो टूट जाता है.

लफ़्ज़ों के दांत नहीं होते, मगर ये काट लेते हैं...

जिंदगी भी पेड़ो की तरह गुजरती है, लोग तोड़कर फल भी खाते है और पत्थर भी मारते है !!!

कुछ ग़म और कई उलझनें है जो दौर है जिम्मेदारियों का तो ख्वाहिशों से भी रंजिशें है.

वो अपने ही होते हैं जो लफ्ज़ों से मार देते हैं !

सभी लोग "मरते" हैं... पर वास्तव में सभी लोग "जीते" नहीं हैं..!!

थोड़ी सी आवारगी भी जरूरी है जिंदगी में, कैद में रहकर परिंदे अक्सर उड़ना भूल जाते है।

फिर एक दिन वो लोग भी सो जाते हैं, जिनको रातों में नींद नहीं आती....

प्यार के बिना जीवन उस वृक्ष की तरह है,जिस पर कभी फल नहीं लगते हैं।

न्यायार्थ अपने बन्धु को भी दण्ड देना धर्म है। मैथिलीशरण गुप्त

दिल के मंदिरों में कहीं बंदगी नहीं करते, पत्थर की इमारतों में खुदा ढूंढ़ते हैं लोग ।

खुद की तलाश में हूं आजकल मुझे आवारा कहने वालों तुम्हारी बात में दम है!

कभी इसका दिल रखा और कभी उसका दिल रखा इसी कशमकश में भूल गए खुद का दिल कहाँ रखा

जो भ्रष्ट होते हैं, वो स्पष्ट नहीं होते हैं....

तुम रूठना तो ऐसे रूठना जैसे माॅं रूठती ही माॅं मेरी सुबह की बात शाम तक भूल जाती है... सपना गर्ग

इक़ अरसे बाद मिलना हुआ उसने बस इतना ही पूछा था आपका मिजाज कैसा है...! बोल नहीं फूटे बस..आंखे भर आईं

हाफ़िज़ ए खुदा परे हट जाये मर्ज़ तेरे बूते का है हि नहींसाकि के मयखाने के सिवाग़म की कोई दवा नहीं होती ।।


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