मंज़िल से ये कहो... के करे मेरा इंतज़ार ठहरा हुआ जरूर हूँ... भटका नहीं हूँ मैं...
उम्मीदें रखना अच्छी बात है ,,
पर हर किसी से रखना गलत बात है..!!
जुनून होना चाहिए लक्ष्य को पाने का ,सपना तो हर कोई देख लेता है ..!!
मीठा खाने का मन था,
ओर ... जेब मे कागज कम था !!
कभी-कभी हमें उन लोगों से शिक्षा मिलती है,
जिन्हें हम अभिमान वश अज्ञानी समझते हैं।
सही वक़्त पर करवा देंगे हदों का एहसास
कुछ तालाब ख़ुद को समंदर समझ बैठें हैं।
मोहब्बत कभी स्पेशल लोगों से नहीं होती
जिनसे होती है वही स्पेशल बन जाते है
जो भारी कोलाहल में भी संगीत को सुन सकता है,
वह महान उपलब्धि को प्राप्त करता है।
डॉ. विक्रम साराभाई
किताबें पढ़कर " विद्वान " बनना बहुत आसान है, लेकिन " नेक इंसान " बने रहना बेहद मुश्किल।
सिपाहियों बैरिकेड लगवाओ
मेरे किसान आये हैं
मेरे किसान आये हैं
नुकीले भाले बिछवाओ
मेरे किसान आये हैं
मेरे किसान आये हैं
भक्तों गालियाँ बरसाओ
मेरे किसान आये हैं
मेरे किसान आये हैं
समझ नही पा रहा हूं की आखिर क्या गलत,चल रहा में मेरा स्वभाव या फिर मेरा वक्त..!!
तबाह होकर भी तबाह नही दिखती...ये इश्क़ है इसकी कोई दवा नही बिकती...
दुश्मन की पसंदीदा चाल,
दोस्तों को एक दूसरे के खिलाफ़ करना हैं…
हुक़ूमत से सिफारिश की तमन्ना हम नही ऱखते..!!!हमे मालूम है हमारी हिफाज़त कौन करता है??
साथ ठहरना आना चाहिए "साहेब"...
चलने को तो सब तैयार हैं...!!
खामोश लोग
सबसे तेज़ दिमाग रखते हैं ...
मेले में भटके होते तो कोई घर पहुँचा जाता
हम घर में भटके हैं कैसे ठौर-ठिकाने आएँगे
वादों की तरह इश्क भी आधा रहा,मुलाकाते कम रही इंतजार ज्यादा रहा….!!
आप दीवार के चित्रों को बदल कर
इतिहास के तथ्यों को नहीं बदल सकते है।
जवाहरलाल नेहरू
मुसीबत में भी रास्ता निकाल लेते हैं..
वक्त कैसा भी हो मां बाप संभाल लेते हैं..!!