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पानी की बूंद जब समुन्दर में होती है तब उसका कोई अस्तित्व नहीं होता, लेकिन जब वो बूँद पत्ते पर होती है तो मोती की तरह चमकती है। आपको भी जीवन में ऐसा ही मुकाम हासिल करना है। हमेशा मोती की तरह चमको...

खुद को श्रेष्ठ खुद नही, औरों को करने दो खुद कहोगे तो मान नही अभिमान झलकेगा।

"माँ थी अनपढ़ लेकिन उसके पास गीतों की कमी नहीं थी कई बार नये गीत भी सुनाती रही होगी एक अनाम ग्राम-कवि" आलोक धनवा

मैं जा रही हूँ – उसने कहाजाओ – मैंने उत्तर दियायह जानते हुए कि जानाहिंदी की सबसे खौफनाक क्रिया है। ~ केदारनाथ सिंह

आज के ज़माने के शुभचिंतक ऐसे होते जा रहे हैं, जो आपका शुभ होते चिंतित हो जाते हैं!

चुनना होंगे नए लोग नई यात्रा के लिए देना होंगे पैर उन्हें चलने के वास्तेपर नहीं होगा आसान छीन पाना उनसे थाम रखी हैं जो रंगीन बैसाखियों

मन ऊदास है ना जाने कैसी ये प्यास है,,,, निगाहे ढूंढती है जिनको ना जाने वो किसके पास है,,,,

टूटे तो बिखर जगाओगे...अंत में तबाह ही हुऐ हैं बिखरने वाले !

ख़्वाहिशे ही तो हैं मन के भीतर कितनी मासूमियत से पनपती हैं उचक उचक कर शिशु की भाँति लगाती हैं पुकार पूर्णता को पाने के लिये पैर पटकती हैं चाहत होती है के सब पा लें सहज़ ही मगर कहाँ इतना सहज़ है इनकी ही तरह सहज़...

मरना तो है ही, अपने मनुष्यत्व और अधिकार के लिए मरो !

भूल गया था अपना असली किरदार मोहब्बत में, आज परछाईं में खुद को मुस्कुराते हुए देखा है..!! विरक्ति

तुम्हारा गुरूर तुम्हें फनाह करवाएगा मैं क्या हूं ये तुम्हें वक्त बताएगा

दिल तुझे नाज था जिस शख्स पर दिलदारी पर..देख अब वो भी उतर आया अदाकारी पर..

आ तेरे संग एक पेंग बनायी जाये , ज़िन्दगी आ बैठ तुझे चाय पिलाई जाए...

पैसों से सिर्फ पेट भरता है , दिल आज भी भावनाओं का ही मोहताज है

जीवन में चाहे परिस्थितियां कैसी भी रहें, वो अपनी जिम्मेदारियां बखूबी निभाता है, और पत्नी के प्रति यदि वफादार है पुरूष, तो मां बाप के लिये श्रवण कुमार कहलाता है..!!

जंगलों में आज भी मुझे लगता नहीं है डर है शुक्र कि अब तक जानवर इंसां नहीं बने अम्बष्ठ

जिस हिसाब से जिंदगी चल री है ना उस हिसाब से मुझे hugs की नहीं drug की जरूरत है

हर दिन होता "चीर" हरण है, तुम कितनी "द्रौपदी" बचाओगे, इन "कौरव" की औलादों पर, अब तुम कब "चक्र" चलाओगे..!! विरक्ति

खामोशी से खत्म हुए रिश्ते, मन में गहरा शोर छोड़ जाते हैं।


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