बुलंदियों का नशा हमने देख रखा है….बड़ा मुुश्किल है आसमां पे ज़मीर साथ रखना..!
स्त्री का सम्मान ही पुरुष की मर्दानगी हैं,और पुरुष के सम्मान में ही स्त्री की सुंदरता हैं…
कितना दर्द है आज दिल में दिखाया नहीं जाता,किसी को अपनी बर्बादी का किस्सा सुनाया नहीं जाता... एक बार जी भर के देख ले इस चहरे को ओ बेवफा सनम,क्यूंकि बार बार कफन उठाया नहीं जाता...!!
इंसान के झूठ का मजा तब आता है जब हमे सच्चाई पहले से पता हो ..!!
जिनको हर मोड़ पे कोई मिल जाएउनको पुराने रास्ते क्या ही याद रहेंगे!!
महीनों की आहट में मोहब्बत करते हैं लोग ,,
और दिनों के रिवाज में रिश्ते निभाते हैं लोग..!!
आपके अल्फाज आपकी परवरिश,
का बेहतरीन सुबूत देते हैं....
इस दुनिया में ऐसे भी शैतान है,
जो धर्म के नाम से सरकार बनाते है. !!
अरे नासमझ है, नादान है, वो मन कि कच्ची हैं अभी,
पढ़ ना सकी कसीदे मेरे इश़्क़ के, शायद वो बच्ची हैं अभी..!!
विरक्ति
वो मस्जिद गया मन्दिर भी गया और गया समुद्र के बीच…..
लेकिन रहा फिर भी नीच का नीच
किस सफर में जिंदगी बदल जाए कोई मालूम नहीं ,,
आज क्या है कल क्या हो जाए कोई मालूम नहीं..!!
खामखां मैने गहराई पसंद कर ली,
कोई उतरा ही नहीं मेरी सोच तक ।
तबाही में भी वो करता है अपनी वाह-वाही...
क्या खूब है इस तानाशाह की ये तानाशाही...
गम से खाली नहीं जिस्म का कोना कोई हम रहे न रहे हम पे मत रोना कोई..!!
बीते मीठे लम्हों का है जो आसराहसरतें खामोश ठहरा ज़ज्बातो का दायरातेरी भीनी आंखों में खो जाए मन मेरातुझसे ही जाने क्यूँ मेरा है ऐसा राब़्ताचादर की सिलवटें में है जो थोड़े फ़ासलेतेरे पास ना होने का करे हर पल...
अगर जो चाहा है वो नही मिला..तो एक बार जो मिला है उसे चाह कर देखो..!!
कुछ परेशानियां इतनी बड़ी होती हैं,की उनके चक्कर में जिंदगी छोटी हो जाती है….
बहुत सीधा सा परिचय है जिंदगी का,
आसूं सच्चाई हैं और मुस्कुराहट एक नाटक...
ये सोचना ग़लत है कि तुम पर नज़र नहीं,
मसरूफ़ हम बहुत हैं मगर बे-ख़बर नहीं.
आलोक श्रीवास्तव