किस सफर में जिंदगी बदल जाए कोई मालूम नहीं ,,
आज क्या है कल क्या हो जाए कोई मालूम नहीं..!!
पिताजी के बाहर जाने पर मां कभी
किवाड़ तुरंत बन्द नहीं करती थीं.
खुली छोड़ देती थीं सांकल
कभी कभी पिताजी
कुछ दूर जाकर लौट आते थे
कहते हुए..
कि कुछ भूल गया हूं
और मुस्कुरा देते थे दोनों...
मां ने सिखाया...
किवाड़ की खुली सांकल
किसी के लौटने...
समय हर समय को बदल देता है...
बस समय को थोड़ा समय चाहिए..!!
हक जिसका था उसी का रहेगा इश्क एकबार होता हैं बार बार नहीं...!!
जज्बातों का भी बाजार थाये जरा तब समझ आया ,एक रोज हम वहां चले गए ,जहां ये शामें लगा करती थी।।
क्यों है
तेरा इन्तेजार ?
किस बात कि
है दरकरार ,, ?
जानता हूँ
कितनी ही सदायें दूँ
तू ना आएगा पलटकर
फिर भी क्यों है
जिया बेकरार
व्यर्थ है आशु
अब पिया मिलन
की आस,,,,,
आशु
छोड़े थे तेरी खातिर कितने हसीन लोग
उनमें से एक के बराबर भी नहीं हैं तू
इक वक़्त था ,हम थे , तुम थे और बातें थीं,इक वक्त है ,हम हैं , तुम हो और यादें हैं…!!
किसी के लिए इतना भी मत गिर जाना कीजिसके लिए गिरे हो वहीं उठाने से इंकार कर दे।
तू बन जा गाली बनारस की मैं शाम तलक..
सियासत संभल कर रहे…
जिस दिन जनता एकजुट हो गई..
समूची राजनीति का बोरिया बिस्तर बंध जायेगा !
सर्वाधिक आनंद उन्हें प्राप्त होता हैजो मौन रहने की कला सीख जाते हैं
सजा मे तुम मिलोगे तो बोलो , गुनाह क़बूल कर लूँ ..!!
दिक्कतों पर जितना ध्यान दोगे वो उतनी बढेंगी ,
समाधान पर जितना ध्यान दोगे वो उतने ही मिलेंगे ...
जो अभिमान छोड़ देता है, वही सबसे बड़ा अभिमान होता है !
परिवर्तन केवल कर्म से आता है,
ध्यान और प्रार्थना से नहीं।
दलाई लामा
शाखें तराशने से ना बनेगी कोई बात,
नफ़रत के सारे पेड़ जड़ों से उखाड़ दो.
प्रतीक्षा मे प्रेम अमर हो जाता हैं,और रूह हमेशा के लिए उम्र-कैद !!
किसी के साथ धोखेबाजी करके खुश मत होना...
तकदीर जब तमाचा मारती है तो वो मुंह पर नहीं...
सीधा रुह पर असर दिखाती है...
ना कश्ती मेरी है, ना माँझी मेरा हैडूबने का डर नहीं ये दरिया मेरा है।
~सौरभ