तुलसी भरोसे राम के, निर्भय हो के सोए।
अनहोनी होनी नही, होनी हो सो होए।
तुलसीदास
गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या-क्या है
मैं आ गया हूँ बता इन्तज़ाम क्या-क्या है
हौंसला और रुतबा बनाए रखिए,दिन अच्छे बुरे आते जाते रहेंगे।
रात चाहे कितनी भी
काली क्यूं न हो
मन में रोशनी का दिया
जलाया जा सकता है
उम्मीद के दीपों से
सजाकर घर अपना
आमवस को
पूर्णमासी बनाया जा सकता है..!
अगर मतलबी लोगों को खो देना एक हार है,
तो ऐसी हार हमें स्वीकार है
"तेरा हर नज़र-ए-अंदाज पसंद है मुझे" "बस एक नज़र अंदाज करना पसंद नहीं"
कइयों को देख गुज़रा हूँतुझको को देख ठहर गया…..!!
ज़िद्दी हूँ बहुत ज़्यादा गुस्सैल भी हूँबत्तमीज़ भी हूँ बेपरवाह भी हूँलेकिन मैंने कभी किसी से भीमतलब के लिए रिश्ते नहीं रखे...
जो आपको सिर्फ़ बहाने दे..
ऐसे शख़्स को जाने दें..!!
दिल मोहब्बत में परेशान तो होगा ही
अब आग से खेलोगे तो नुकसान तो होगा ही....!!
सब बीत जाता है
पल हो
दिन हो
महीना हो
या फिर हो साल
जो नहीं बीतता वो है सिर्फ़
तेरा ख़्याल
यूँ खामोश रह कर ना सतामाना के हम तेरे तलबी है दूर रहकर परेशान ना कर,,,,,बेचैन दिल को और बेचैन ना कर,इश्क़ करना है तो कर एहसान ना कर..
रिश्ते ऐसे बनाओ कि जिसमें,
शब्द कम और समझ ज्यादा हो...
हर लम्हा सांसें बुड्ढी हो रही है
जिंदगी मौत के साये में हैं फिर भी जिद्दी हो रही है
बेवफा को बेख़बर रखना मेरी मौत की खबर से
जमाने के लिए आंसू हैं वो अंदर हस रही है!!
अँगूठीयों में कोयला जड़ा जा रहा हैहीरों की परख है अब अंधों के हाथ में
-अम्बष्ठ
आपका आत्मसम्मान अगर किसी कोघमंड लगता है,तो उसे बिल्कुल लगने देना चाहिए..!!
एक तुम गये केपूरा काफिला गयातूफा था तेजपेड़ को जड़ से हिला गया ….
जब सल्तनत से दिल काही राजा चला गयाफिर क्या मलाल तख्तगया या किला गया….
मोहब्बत में काम आई कोई दवा न दुआ मुझे.
जब दे सकी शिफ़ा न किसी की दवा मुझे ...
तेरे वास्ते फ़लक से मैं चाँद लाऊँगा, सोलह सत्रह सितारे संग बांध लाऊँगा"पर कच्छा खुद नही धोऊँगा.
ये जो तुम कहते हो कोई नहीं अपना,कभी ख़ुद से पूछो क्या तुम किसी के हो पाये.