ये कागज की डिग्रियां नही करती फैसला संस्कारों का,आपकी तरबियत बताती है खानदान कैसा है
हमसे दिखावा नहीं होता,
हम आईना है हमसे ये फरेब नहीं होता।
क्षण क्षण रण है, दर्पण रण है,
जीवन, मृत्यु तक एक रण है !
समंदर में ले जा कर फरेब मत करना,
तू कहे तो किनारे पे डूब जाऊं में।।
दो रोटी के वास्ते, मरता था जो रोज ।
मरने पर उसके हुआ, देशी घी का भोज ॥
ख़्वाहिशे ही तो हैं
मन के भीतर
कितनी मासूमियत से पनपती हैं
उचक उचक कर
शिशु की भाँति लगाती हैं पुकार
पूर्णता को पाने के लिये पैर पटकती हैं
चाहत होती है के सब पा लें
सहज़ ही
मगर कहाँ इतना सहज़ है
इनकी ही तरह सहज़...
संभोग करना आसान हैं,
और शादी करना मुश्किल हो गया हैं...
लकीरों की इस भीड़ मेंकाश होती एक लकीर तेरे नाम कीबस वही बना लेते अपना घरऔर बंद कर लेते अपनी सारी ख़ुशियाँहमेशा के लिए अपनी मुट्ठी में
ख़्वाहिश है कि ख़ुद को भी कभी दूर से देखूँ !मंज़र का नज़ारा करूँ मंज़र से निकल कर !!
जरूरत पड़ने पर जो साथ दें,
वो अपने से बेहतर होता हैं...
आग अपने ही लगा सकते हैं
ग़ैर तो सिर्फ़ हवा देते हैं!
— मोहम्मद अल्वी
दूसरो को वीरान करने वाले,
कभी आबाद नही हुआ करते...
अब रिश्ते भी नौकरी की तरह हो गए है,
बेहतर Offer मिलते ही लोग Change कर लेते है !
पत्थर में भगवान है, लेकिन इंसान में इंसान नहीं !
धर्म से बड़ा देश होता है। मातृभूमि होती है। सिख धर्म में बाल कटवाना वर्जित है, लेकिन अपने देश के लिये मैं बाल तो क्या गर्दन भी कटवा सकता हूँ। ~ शहीद भगत सिंह
लाइलाज मेरे जख्म का अगर सनम तुझे पता नहीं, आंखों से दे ज़हर इश्क की इससे अच्छी दवा नहीं
अवसर के बिना काबिलियत कुछ भी नहीं है।
नेपोलियन
सब चीज़ बिकाऊ है यहाँ ,इंसाफ से लेकर इंसान तक !!
उद्देश्य और दिशा के बिना,
प्रयास और साहस पर्याप्त नहीं है....
तीर्थंकर महावीर ने कहा-सोचो.शंका करो क्योकि सत्य केअनेक कोण होते हैप्रश्न करो.तब सत्य को पहचानोजरूरी नही कि वही शाश्वत सत्य है जो कभी किसी ने लिख दिया थामगर साथ ही हर बात में ‘शायद’ का ध्यान अवश्य रखना यही 'स्यादवाद...