लगता होगा चांद बहुत खूबसूरत है ,मगर लोगों ने तुम्हें देखा ही कहां है ।।
जब शौक के लिए वक्त ना मिले,
तो समझ लेना जिन्दगी शुरु हो गई है ..
हिसाब भरी ज़िन्दगी को बेहिसाब जिया जाए ,
महीना सावन का आ गया है महादेव से इश्क किया जाए ..!!
मोहब्बत मेरी आख़री शरारत थीफिर यूं हुआ के मैं बचपन से निकल आया….!
वफ़ा और मोहोबतों के ज़माने गए,अब तो दिल बहलाने का सामान है मोहोबत !!
कि मरने के बाद भी मेरी आंख खुली रही,आदत जो पड गई थीं तेरे इंतज़ार की...
रोज़ शाम को डूब जाता है ,सूरज को तैरना सिखाना है…
मैंनेगुलाब कीमौन शोभा को देखा !उससे विनती कीतुम अपनीअनिमेष सुषमा कोशुभ्र गहराइयों का रहस्यमेरे मन की आंखों मेंखोलो !मैं अवाक् रह गया !वह सजीव प्रेम था !मैंने सूंघा,वह उन्मुक्त प्रेम था !मेरा हृदयअसीम माधुर्य से भर गया !
उसे बारिश का मौसम अच्छा लगता था , मुझे उसके साथ बारिश मे भींगना !!
पा तो लिया इंसाँ ने दोनों ही जहां
पर इंसाँ में इंसाँ ही बाकी न रहा
फ़रिश्ते ही होंगे जिनका इश्क़ मुकम्मल हुआ,इंसानों को तो हमने सिर्फ़ बर्बाद होते देखा हैं..
टमाटर का भाव खाना एक बार समझ आता हैं, लेकिन अदरक शक्ल ना सूरत फिर भी 200 रू किलो...शायद इसलिए ही इसे कूटा जाता है..