उसे बारिश का मौसम अच्छा लगता था , मुझे उसके साथ बारिश मे भींगना !!
ढलती उम्र के साथमोहब्बत बढ़ती जाएबस तुम्हारा इतना साथ चाहिए।
-नेहा यादव
हे बजरंगबली आप करूणा के सागर दया के भंडार हो,अपनी कृपादृष्टि बनाए रखो बाबा जिससे सबका बेड़पार हो..!!
जीवन एक ऐसा रंगमंच है,
जहां किरदार को खुद नहीं पता होता,
कि अगला दृश्य क्या होगा...
कुछ दरवाज़े कभी बंद नहीं होते
बस हम ही खटखटाना छोड़ देते हैं
मूर्ख से बहस करना गाल पर बैठे मच्छर को मारने जैसा है,
मच्छर मरे या ना मरे पर आपको थप्पड़ ज़रूर लगेगा।
मोहब्बत में जो सुन रखा था वैसा कुछ नहीं होता,
इसमें बन्दा मरता है और ज़्यादा कुछ नहीं होता
रुकना नहीं है...
थकना नहीं है...
और झुकने का तो सवाल ही नहीं बनता !
भूख बड़ी बेशर्म है,उम्र के किसी भी मोड़ परआदम जात का तमाशा बना देती है।
व्यर्थ का तक़ल्लुफ़ क्यों किसी से निभाना..जहाँ दिल न मिले वहाँ हाथ क्यों मिलना..!!
मंदिर बहुत बना लिया,
अब एक लंका भी बना दो,
जहा सीता जैसी बहन बेटी सुरक्षित रह सके ....!
खुद की कीमत गिर जाती है...
किसी और को कीमती बनाते बनाते..!!
मनुष्य कितना भी बड़ा क्यो न बन जाए,
उसे हमेशा अपना अतीत याद करते रहना चाहिए।
ईश्वरचन्द्र विद्यासागर
कार्यों को प्रारंभ न करना बुद्धि का पहला लक्षण है और प्रारंभ किए हुए कार्य को पूरा करना दूसरा।
मरहम लगता है उसके ज़ख्मों पर,
वो हर भवसागर से तर जाती है,
जब बेटे कि पहली तनख्वाह से,
मां के सपनों कि साड़ी आती है..!!
चरण कमल राधा रानी के, जहाँ जहाँ पड़ जाएं,
मिट्टी के कण भी झूम झूम, बस राधे राधे गाएं !!
कितना अजीब हैं .. दर्द उसका हैं, और उस दर्द की चीख मेरे कानो में गूँजती हैं ...
दाग़ जब चरित्र पर हो तोफिल्टर लगाने से साफ नहीं होते…..!!
रोज़ अच्छे नही लगते आँसू खास मौको पे मज़ा देते है..!!
हाय वो जिम्हें देखा भी नही याद आये तो रुला देते है..!!
आग अपने ही लगाते हैगैर तो सिर्फ हवा देते है…!!
शरीर की हिफाजत धन से भी अधिक करनी चाहिए,
क्योंकि शरीर बिगड़ने के बाद धन भी उसकी हिफाजत नहीं कर सकता।