अगर इतिहास को कहानियों के रूप में पढ़ाया जाता तो इसे कभी नहीं भुलाया जाता।
तपस्या अगर पार्वती की थी तो प्रतीक्षा शिव की भी रही होगी
मेरी ईद ख़राब करने वालेतेरी नींद ख़राब न हो कभी
चांद नहीं, सूरज नहीं,एक छोटा सा ख्वाब मांगा था,इक उम्र नहीं, कुछ साल नही,दो पल का साथ मांगा था,कोई नाम नही, कोई लफ्ज़ नही,बस इक एहसास तो मांगा था।।
न हो सका तुमसे इतना भी,कुछ ज्यादा नहीं…बस बेकरारी में करार मांगा...
आज की दुनिया का यही कायदा है,
उधर कदम जिधर फायदा है....!!
किसी बद्दुआ की गिरफ्त में हूँ,मुझे मेरे हक की मोहब्बत नहीं मिलती.
जीवन बड़ा नीरस सा हो गया है,वापसी कि आस तेरी अब भी है.
समय जब विपरीत हो, तो शांत रहना ही सही होता है...
सोने से पहले इक काम तुम कर देना. तक़लीफ देते हैं ख़्वाब आने से पहले जगा देना. ~ मालती
तुम बदले तो गम भी कहाँ पुराने से रहे,तुम आने से रहे तो हम भी बुलाने से रहे ।।
अकेले बैठ कर तुमको कभी जब याद करता हूं ,
मैं रोना मुस्कुराना दोनो साथ करता हूं ..!!
थोड़ा रंग बचा के रखना,
देर से ही सही मगर
हम आएंगे जरूर..
ज़िंदगी में एक बार मोहब्बत ज़रूर करनी चाहिए
ताक़ि ये पता चल जाए मोहब्बत क्यों नहीं करनी चाहिए
जिसे कोई नहीं सुधार पता,उसे वक्त सुधार देता है…
यूं तो सब समेट लाया था शहर से तेरे
मगर वो मन्नत के धागे मज़ार पर बंधे रह गए..
नाराज़ हो जाते हैं अब वो साहब
जब जवाब हम उन्हें उनके ही लहज़े में देते हैं
खून का वो आख़िरी क़तरा,
जो वतन की हिफ़ाज़त में गिरे,
दुनिया की सबसे अनमोल चीज़ है
फिक्र से चेहरे कि चमक मिटा लेती है,गंदी नियत लबों से उसके मुस्कान हटा लेती है,
पीड़ा भी झलकती है उसकी आंखों में,लेकिन खुद को वो निःशब्द बना लेती है,
और अपनी औकात से ज्यादा सहती है वो,अपमानित हो चरित्र तो खुद...
तेरे साथ लम्हें इतनी रफ्तार से गुज़रे
जैसे किसी बच्चे का दिन इतवार सा गुजरे!
ज़िन्दगी बहुत खूबसूरत है इसे बचाएं,
फिलहाल दूरियों से ही इसे सजाएं..!!