यह जिस्म होता हैतो सब कुछ ख़त्म हो जाता हैपर चेतना के धागेकायनाती कणों के होते हैंमैं उन कणों को चुनूँगीधागों को लपेटूँगीऔर तुम्हें मैं फिर मिलूँगी…
~ अमृता प्रीतम
उतार फेंको बुजदिली का कफन ऊपर से
आप आजाद इंसान हैं "नेता के गुलाम नहीं।
तेरी एक चाय ने खरीद लिया हमें,बड़ा गुरूर था हमे की हम बिकते नहीं...
दोस्त हो या प्यार उन्हें छोड़ देना उचित है , जो आपके होने का मूल्य ना जानते हों ...
जुबान खराब होना दिमाग
खराब होने की पहली निशानी है
जब लहजे बदल जाएं तो वज़ाहतें कैसी..नए मयस्सर हो जाएं तो पुरानी चाहतें कैसी..!!
दरिया हो या पहाड़ हो टकराना चाहिए
जब तक न साँस टूटे जिए जाना चाहिए
तू न थकेगा कभी, तू न रुकेगा कभी, तू न मुड़ेगा कभी, कर शपथ, कर शपथ, कर शपथ, अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ। यह महान दृश्य है, चल रहा मनुष्य है, अश्रु श्वेत रक्त से, लथपथ लथपथ लथपथ, अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ।
गम से खाली नहीं जिस्म का कोना कोई हम रहे न रहे हम पे मत रोना कोई..!!
ख्वाहिशों के समंदर के सब मोती तेरे नसीब हो,
कुछ यूं उतरे तेरे लिए रहमतों का मौसम,
कि तेरी हर दुआ, हर ख्वाहिश क़ुबूल हो।
ख़ुदकुशी को टालकर आया हूँ मैं,
हाँ बताओ! क्या ज़रूरी बात है ?
सच में अक्सर ऐसा होता
जब भी मेरे मन
और संघर्ष के बीच युद्ध होता है
सोचते अब लड़ के खड़ा हुए की
फिर लड़खड़ा के गिर ही जाते हैं
शायद यही असल ज़िंदगी का
यथार्थ मतलब है।
नेहा यादव
स्वार्थ की बदबू मारने वाले मतलबी लोग…..
मतलब होने पर चंदन सी सुग़न्धित बातें करते है !!!
उन हाथों को कभी मत भूलना..
जिन्होंने तुम्हे बड़ा किया है..!!
आप वख्त लेकर आगे बढ़िए, हम अपना दौर लेकर आएंगे....
जिंदगी की रफ्तार में,
जमीर को रौंदकर लोग आगे बढ़ रहे है।
हो लेने दो बारिश हम भी रो लेंगे
दिल में हैं कुछ ज़ख़्म पुराने धो लेंगे
सदार आसिफ़
उदासी में कुछ पल जन्नत में जिओगे क्या,चाय बना रहा हूं अदरक वाली पिओगे क्या ?