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शीत लहर के स्पर्श से जब मन झंकार उठा मधु कूक कोयल से जब हृदय में ज्वार उठा तब शब्द हार पहन विरही मन मुख से कविता गान उठा

अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप। अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप॥ ~कबीरदास

परिवार, हालात और रिश्ते जो संभालना चाहता है,वही झुक जाता है,वर्ना स्वाभिमान तो सुदामा का भी कहाँ कम था।

कुदरत को गहराई से देखो,आपको सब कुछ साफ-साफ समझ आएगा !

थोड़ा रंग बचा के रखना, देर से ही सही मगर हम आएंगे जरूर..

कुछ अजीब सा चल रहा है वक्त का ये सफर एक गहरी सी खामोशी है खुद के अंदर!

अब किसी की तलब नही हमे... अब हम अपनी ही तलाश में है....!!

न हम-सफर न किसी हम-नशीं से निकलेगा हमारे पाँव का काँटा हमीं से निकलेगा...!!

सूरज सितारे चाँद मेरे साथ में रहे,जब तक तुम्हारे हाथ मेरे हाथ में रहे..

कुछ लोग ज़िंदगी में भी मुर्दा होते है और कुछ मरने के बाद भी जिंदा ...

अगर विश्वास खुद पर हो तो, उजड़ी हुई जिंदगी भी खिल जाती है ..!!

बहाने बना कर तुम अपना वर्तमान तो सरल कर लोगे लेकिन भविष्य कठिन बना लोगे !

खुश और शांत नजर आने वाला इंसान, अक्सर तूफानों से घिरा होता है....!!

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किसानों के लिए MSP की लड़ाई युवाओं के लिए रोज़गार की लड़ाई वंचितों के लिए हिस्सेदारी की लड़ाई जन-जन के लिए लोकतंत्र की लड़ाई

मुझे मालूम था मेरी मंज़िल "मौत" है, फिर भी चाह "जीने" की करता रहा, मुझे नहीं थी परख सही या ग़लत की, मैं गुस्ताखी पर गुस्ताखी करता रहा, और जब "जुदा" हुआ उनसे तब मैंने जाना, सफ़र में तो वो थे "ठोकरें" मैं खाता रहा..!!

कभी-कभी लोग सच नहीं सुनना चाहते क्योंकि वे नहीं चाहते कि उनका भ्रम टूट जाए। फ़्रेडरिक नीत्शे

साथ रोना साथ हँसने से ज्यादा बड़ी चीज है।

तुम ने तो सितारों को दूर ही से देखा है,तुम समझ न पाओगे आसमां की तनहाई…

कौन आगे है, कौन पीछे इससे मुझे क्या? मेरा मुकाबला ख़ुदसे है, औरों से नहीं।

भीगा भीगा सूरज हैभीगी भीगी सी रातख्वाबों को जा के कह दोखलेल न पहुँचाएँआज है उनसे मुलाकात…चांदनीहवा पहन करखुश्बू लूंटाने लालायित है,सूरज की साक्षी मेंखूबसूरत शब काहो रहा है #आगाज़आज आजहै उनसे मुलाकात ..श्रुंगार भैरवी काहो रहा #आगाज़आज आज..


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