जो #तवायफ़ से पूछी वज़ह#जिस्मफरोशी की,
वो बोली #मोहब्बत पे यक़ीन करके#घर से भागी थी..!!
जीवन जीते जी एक संग्राम है,
पहले कुछ करके दिखाना,
फिर अहंकार की मिट्टी में उसे दबने से बचाना…
मेरी आँखों में ये जो पानी है,
तेरी आँखों की मेहरबानी है।
जिंदगी की रफ्तार में,
जमीर को रौंदकर लोग आगे बढ़ रहे है।
जेब में अगर पैसा हो तो लोग..
आपकी बकवास भी सलाह मानते है..!!
क्यूं सोचें, के चार लोग क्या कहेंगे?
समाज में महज़ चार लोग थोड़ी है।
कभी ये मत सोचिए कि आप अकेले हो,बल्कि ये सोचिए कि आप अकेले ही काफी है।
मुझमें बसने वाले शख्स ने,❣️✨❣️मुझमें रहना छोड़ दिया..!!!
चल जी कर दिखाते हैं…..दिखा कर जीने में क्या मज़ा …..!!!
कृष्ण में लीन मीरा
कृष्ण-प्रेम में मग्न है रहती
सुधबुध है खोई अपनी
बावरी कृष्ण-भजन में डूबी रहती
दरस की अभिलाषी मीरा
विष को भी अमृत मान है पी लेती
मोह कहाँ है उसे इस जग से
हर साँस वो गिरधारी को समर्पित करती
ऐसी है दर्श दिवानी...
हमारी खामोशी को हरगिज बुझदिली ना समझा जाये,,,अभी हम तेरे जुल्म और अपने सब्र की इंतहा देख रहे है,,
और धीरे धीरे मैंने ये मानना शुरू कर दिया,
कि मैं किसी के लायक नही हूं अकेली ही ठीक हूं..!!
हिम्मत इतनी रखो..
की किस्मत छोटी लगने लगे..!!
संयम क्या है?एक युद्ध अपने ही विरुद्ध
मेरा दर्द भी इन मोतियों की तरह बिखरा पड़ा रहता हैं, धागे में पिरोने की कोशिश करूं तो धागे भी टूटने लगते हैं
शत-शत दीप इकट्ठे होंगे
अपनी-अपनी चमक लिए,
अपने-अपने त्याग, तपस्या,
श्रम, संयम की दमक लिए।
सांसें उधार ले के गुज़ारी हैं जिंदगी
हैरान वो भी थी कि मैं मर क्यूं नहीं गया
हम दोनों को हम जैसे बहुत मिलेंगेबस हम दोनों को हम दोनों नहीं मिलेंगे!!🥀
आए हैं सो जाएँगे, राजा रंक फकीर ।
एक सिंहासन चढ़ि चले, एक बंधे जंजीर॥
कबीर
मौत भी तू जल्दी आया कर गरीब के घर, कफन का पैसा भी खर्च होता है दवाइयां खरीदते-खरीदते..