सजा जो भी चाहो ,आप मुकर्रर कर दो,
जब खता ही नहीं कई तो मुआफी कैसी।
बेटे खुश ना भी हों तो कौनसा, घर वालों को पता चलने देते हैं....
कामयाबी का तभी "सिंहासन" होगा,
जब आपका अपने "मन" पर शासन होगा।
सेजल
उस दिन पर लानत भेजता हूं..
जिस दिन पहली बार देखा था तुझे..!!
जली को आग कहते हैं,बुझी को राख कहते हैं।और जो अंधभक्तों के पास नहीं हैउसे दिमाग कहते हैं
जहाँ कर्म से भाग्य बदलते,
श्रम निष्ठा कल्याणी है।
त्याग और तप की गाथाएँ,
गाती कवि की वाणी है॥
ज्ञान जहाँ का गंगा जल सा,
निर्मल है अविराम है।
हर बाला देवी की प्रतिमा,
बच्चा-बच्चा राम है॥
मोहब्बत में काम आई कोई दवा न दुआ मुझे.
जब दे सकी शिफ़ा न किसी की दवा मुझे ...
सिगरेट के धुंए से भर गया था कमरारात को उसकी तलब जोर की लगी थी…
नाराजगी चाहे कितनी भी क्यों ना हो,पर तुझे छोड़ देने का ख्याल हम आज भी नहीं रखते
बहुत मुश्किल से समझ आता है कि ज़िंदगी में,
ज़्यादा ज़रूरी ख़ुशी नहीं, "सुकून है
ना बाप का साया,
ना रिश्तेदार और ना ही कोई रहबर है,
सर पर कई जिम्मेदारियां ऊपर से मुफलिसी का कहर है..!!
हम चाह के भी खण्डहर ना हो पाए, मेरी बुनियाद में, तेरे नाम के पत्थर जो लगे हैं...
अगर पैसा और संबंध दोनों में से एक को महत्व देना पड़े तो, संबंध को बचाना पैसा तो आता जाता रहेगा..!!
पर्दे अच्छे, कम से कम बातें छनकर तो आती हैंदीवारों का क्या है.. वो तो आवाज़ें खा जाती हैं !!
अगर कोई हमेशा आपको व्यस्तहोने का दिखावा करता है तो वहव्यस्त नही किसी और के साथ मस्तरहता है, कितना भी याद कर लोकितना भी जता लो एक दिन खुदको ही लगेगा कि अब अपना रास्ताअलग ही सही है सूचना जनहित...
छोटी छोटी चीजों में खुशी ढूंढना सीख लो, जरूरत पड़ने पर अपना हाथ खुद पकड़ना सीख लो।
एक हमारे उठने से क्या होता है,
आंख दुनिया की भी तो खुलनी चाहिए...
8 अरब वाली दुनिया में, एक तुमसे ही तो इश्क़ है ..!!
चक्रव्यूह रचने वाले सारे अपने ही होते हैं , कल भी यही सच था और आज भी यही सच है ...