ख़ामोश हूं मैं भी वक्त की तरह,
शोर करूंगी तो समझना कयामत आ गईं!
बुरा वक़्त भी गुज़र ही जाता हैबस रब को हमारा सबर आजमाना होता है!
छल करोगे तो छल मिलेगा!!
आज नहीं तो कल मिलेगा!!
जिओगे जिंदगी सच्चाई से
तो सुकून हर पल मिलेगा..!!
किस सफर में जिंदगी बदल जाए कोई मालूम नहीं ,,
आज क्या है कल क्या हो जाए कोई मालूम नहीं..!!
जो कहते थे, हम साया है तेरा, अंधेरा आने पर वो, खरे उतरे !!
अपनी हालत का ख़ुद एहसास नहीं मुझ को,,
मैंने औरों से सुना है के परेशान हूँ मैं...!!
कोशिश करे ,शिकायत नहीं...
शादीशुदा मर्द की इज्जत,
औरत की वफादारी पर टिकी होती है।
गलत बात पर भी जो लोग वाह-वाह करते हैं... असल में वही आपकी जिंदगी तबाह करते हैं..!!
समय विश्वास और सम्मान यह ऐसे पक्षी है,जो उड़ जाए तो फिर वापस नहीं आते…!
तुम अलविदा कहकर चले गएऔर ना जाने कितने ही मौसम बदल गएपर देखो ना…,मैं आज भी वहीं खड़ी हूंक्योंकि मैं तुम्हें अलविदा ना कह पाई!
और इक वक़्त के बाद इंसान इतना ख़ामोश हो जाता है,
कि उसकी सांसें भी ख़ामोशी में ख़लल लगती हैं.
भीख माँगना भी एक धंधा है। ग़रीब माँगे तो भीख है, नेता माँगें तो चंदा है।
शैल चतुर्वेदी
जितनी शिद्दत से तुझे चाहा था
तूझे भूलने में उतनी ही ज़हमत उठानी पड़ रही है..
तुमने तोड़ा है इतने टुकड़ों में मुझे तुम क्या जानो खुद को समेटने में कितनी मशक्कत उठानी पड़ रही है..
ना रातों को चैन है ना दिन...
किसी के साथ किसी भी प्रतियोगिता की कोई ज़रूरत नहीं है। तुम जैसे हो अच्छे हो, अपने आप को स्वीकार करो।
किसी का मिलना, मिलकर बिछड़नाकभी हसना कभी मुस्कुरानाऔर फिर मुस्कुराकर रो देनायहीं तो हैं ज़िंदगी..!!
तुम्हारी यादों के सिक्के…!! रातों में बे आवाज़ बजते हैं …!!
रिश्तों में बातें ज़रूरी होती हैं।
इतेफाक से तो नही हम दोनो टकराए कुछ तो साजिश खुदा की भी होगी
गरीब की थाली में पुलाव आ गया हैलगता है शहर में चुनाव आ गया...