sj_coat_512x512_web

World's Best Cow Hospital

पहले निचोड़ लेते हैं जिस्म अपनी आंखों से, फिर दुपट्टा संभालने कि हिदायत देते हैं..!!

अपनी रुह का लिबास भी दे दूँगा तुझे…तू मुझमें रहने का पहले फैसला तो कर..!!

मां ममता की मूरत बन गयी,पिता संघर्ष के प्रतीक रह गए।चोट लगी तो मां के अश्रुधार बहे,पिता मौन में दुःख को सह गए।।

अपनी हालत का ख़ुद एहसास नहीं मुझ को,, मैंने औरों से सुना है के परेशान हूँ मैं...!!

शब्दों का भी तापमान होता है साहब , ये सुकून देते हैं तो जला भी सकते हैं।।

सकारात्मक कार्य करने के लिए हमें एक सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना चाहिए।

नौकरी नौजवानों के जीवन का वह श्रृंगार है, जिसके बिना समाज का कोई भी अंग उन्हें सम्मान की दृष्टि से नहीं देखता है।

मुझे खेद है कि मैं प्यार में बुरा हूँ लेकिन मैंने तुम्हें अपनी सारी खामियों के साथ प्यार किया।

त्याग दो सब ख्वाहिशें कुछ अलग करने के लिए‘राम’ ने खोया बहुत कुछ ‘श्री राम’ बनने के लिए...

मुझे भी सिखाओ तुम मुकरने का हुनर थक गया हूं वादे निभाते निभाते!

तुम हाथ थाम लेते होमैं चल पड़ती हूँ तुम नज़र भर देखते होमैं मुस्कुरा देती हूँ तुम क़रीब आ जाते होमैं शरमा जाती हूँ तुम आग़ोश में भरते होमैं सिमट जाती हूँ तुम माथे को चूम लेते होमैं समर्पित हो जाती हूँ

पुष्प की सुगंध वायु के विपरीत कभी नहीं जाती, लेकिन मानव के सदगुण की महक सब ओर फैल जाती है। गौतम बुद्ध

वक्त का खास होना जरूरी नहीं.... खास लोगों के लिए वक्त होना जरूरी है...!!

तुमसे प्रेम करने के बाद महसूस हुआ है कि तुमसे बात करने से अक्सर मैं अपनी सारी परेशानियां,मुश्किलें भूल जाया करती हूं,जैसे एक सुकून का अनुभव होता है,जब तुम पास होते हो तो ऐसा लगता है जैसे ईश्वर से की...

कबीरा तेरे जगत की है कैसी ये तकदीर जनता सारी सड़कों पर, बैठे महल फ़कीर

मनचाहा पाने के लिए, चाहना भी मन से पड़ता है...

विद्वत्ता अच्छे दिनों में आभूषण, विपत्ति में सहायक, और बुढ़ापे में संचित धन है।

सब लोग कहते हैं ..... " सीता और द्रौपदी के कारण हुई रामायण और महाभारत, किसी ने यह नहीं कहा नारी का सम्मान न करने अंत है रामायण और महाभारत " !!

दूसरों के कर्मों का श्रेय स्वयं लेकर आप जयेष्ठ बन सकते हैं, श्रेष्ठ कदापि नहीं !

शतरंज हो या ज़िंदगी, जीतने के लिए धैर्य रखना पड़ता हैं...


Concept, Created & Designed by sureshjain.com


© copyright 2025. sureshjain.com All Rights Reserved.

Translate »