इतने हिस्सों में बँट गए है हम ..
जैसे अंदर से कट गए है हम … !!
जिस दिन हम अपनी हद पार करेंगे,
तुम्हे तेरी सल्तनत से भी उठा लाएंगे !!
इरादा है बदलने का तो कोशिश कर बदलने की
अगर सूरज नहीं है तो चराग़ों से उजाला कर
मिलेगी हार या फिर जीत का परचम उठाएगा
नतीजा जो रहे लेकिन नया सिक्का उछाला कर
राघवेंद्र द्विवेदी
समझौता करो तो खुद से करो क्योंकि, अपने से फैसला लेना भी सही रास्ता होता है !!
फितरत से जो गिरगिट होता है
राजनीति में वो फिट होता है !
लबालब भरा हो जो फ़रेब से
किरदार वो बड़ा हिट होता है !
सब चीज़ बिकाऊ है यहाँ ,इंसाफ से लेकर इंसान तक !!
पतझड़ में सिर्फ़ पत्ते गिरते हैं,
नज़रों से गिरने का कोई मौसम नहीं होता.....
पैसों से सिर्फ पेट भरता है ,
दिल आज भी भावनाओं का ही मोहताज है
तुम्हें छूकर मैंने जाना
किसी रेलगाड़ी के गुजरने पर
धरती कांपती क्यों है।
तुम्हें चूमकर मैंने जाना
छूइमूई के पौधे का रहस्य।
तुम्हारे आलिंगन से मैंने जाना
चन्द्रमा पर प्रथम मनुष्य होने का एहसास।
तुमसे प्रेम करके मैंने जाना
मछुआरे और मछली के बीच...
उसको खोने से ज़्यादा मुझे इस बात की तकलीफ़ है
कि वो नादान किसी गलत हाथ को न थाम लें…🥀
हमें ऐसी शिक्षा चाहिए जिससे चरित्र का निर्माण हो,
मन की शक्ति बढ़े,
बुद्धि का विकास हो
और मनुष्य अपने पैर पर खड़ा हो सके"
स्वामी विवेकानंद
अब तो हर गली का पत्थर हमें पहचानताहैं उम्र गुजरी हैं तेरे शहर में आते जाते !!!
स्वर्ग के सम्राट को खबर कर दो,
रोज ही आकाश चढ़ते आ रहे हैं हम..
बेवजह ही नही होती लोगों से मुलाकात,
किसी से सबक मिलता है,
तो किसी से मिलता ज्ञान....
अपनी उम्मीद हमेशा ख़ुदा से रखो,इंसान कब बदल जाए कोई भरोसा नही ॥
जिनके पास लक्ष्य नहीं होता,
उनका मन उन्हें फालतू कामों
और तनाव में उलझा कर रखता है।
संघर्ष प्रकृति का निमंत्रण है,
जो स्वीकार करता है वही आगे बढता है....
पोथी पढ़ि-पढ़ि जग मुवा, पंडित भया न कोइ।
ढाई आखर प्रेम का, पढ़ै सो पंडित होइ॥
कबीर दास
रूह में बसा हुआ शख्स,दिल से कभी नहीं निकलता….
गधों को सफलता मिलने का मतलब ये नहीं कि वो टैलेंटेड हैं, हो सकता है कोई घोड़ा रेस में दौड़ा ही न हो।
जैकी यादव