शेरों के साथ संगत बनाइए..
कुत्तों के साथ बैठने से आप सिर्फ पीठ पीछे भोकना ही सीखेंगे..!!
विनय विफल हो जहाँ, बाण लेना पड़ता है।
स्वेच्छा से जो न्याय नहीं देता है, उसको
एक रोज आखिर सब-कुछ देना पड़ता है।
सच को कहाँ होती है तमीज़ बात करने की ,झूठों से सीखो कितना मीठा बोलते हैं …
मुझसे जो तुम मेरा हाल पूछते हो,
बहुत मुश्किल सवाल पूछते हो....
पुरुष सफ़ल रहे जीवन में या असफल रहे... वो हर परिस्थिति में एक छली गई स्त्री या टूटी हुई स्त्री के जीवन को बदल सकता है उन्हें सकारात्मक कर सकता है और सहायता करने को तत्पर रहता है, परंतु स्त्री...
ये गंदगी तो महल वालो ने फैलाई है “साहिब”
वरना गरीब तो सङको से थैलीयाँ तक उठा लेते है !!
खयालो मे रहता है वो, जो पास नही होता…बैचेन हैं उनके लिए जिनको एहसास नहीं होता..
सावन का महीना है तू घर से निकली भी नहीं
माना कि खूबसूरत है तू, मगर इतनी भी नहीं।
~सौरभ
अवसर के बिना काबिलियत कुछ भी नहीं है।
नेपोलियन
तुम हाथ थाम लेते होमैं चल पड़ती हूँ
तुम नज़र भर देखते होमैं मुस्कुरा देती हूँ
तुम क़रीब आ जाते होमैं शरमा जाती हूँ
तुम आग़ोश में भरते होमैं सिमट जाती हूँ
तुम माथे को चूम लेते होमैं समर्पित हो जाती हूँ
बहुत सीधा सा परिचय है जिंदगी का,
आसूं सच्चाई हैं और मुस्कुराहट एक नाटक...
ये जीवन जिंदगी और मौत के….बीच का एक खूबसूरत सफर है…!!
ना जाने कौन सी दौलत है तुम्हारे लहज़े में,बात करते हो तो दिल खरीद लेते हो….
आजादी का सबसे बड़ा दुश्मन,
संतुष्ट गुलाम है।
बाप की आँखों से गिरने वाला एक
आंसू आपको तमाम उम्र रुला सकता है
ये सोचना ग़लत है के’ तुम पर नज़र नहीं,मसरूफ़ हम बहुत हैं, मगर बे-ख़बर नहीं
हम आपके इशारे पे घर-बार छोड़ दें ?दीवाने हैं ज़रूर ! मगर इस क़दर नहीं !!
~ आलोक श्रीवास्तव
कुछ गुमनाम सा इश्क है ये मेराअधूरा था अधूरा है और अधूरा ही रहेगा..🥀
मजबूत हूं लेकिन फिर भी टूट जाता हूं
मुझे अपनों का अजनबी लहजा बहुत तकलीफ देता है
भावनाओं का कोई पार्थिव शरीर नहीं होता,
उनका बस अंतिम संस्कार होता है।।
आज की सुबह खास है बादल का वो टुकड़ा बारिश के साथतेरी यादों की फुहार भी लाया है मैं खुद को आज सींचूँगीमन में बसी विरह की तपिशको इन गिली बूंदो सेकुछ नयी कलियाँ कुछ नये सपनेकुछ नये से तुम...