क़िताब सादा रहेगी कब तक।....
कभी तो आगाज़ -ए- बाब होगा।.....
जिन्होंने बस्ती उजाड़ डाली।......
कभी तो उनका हिसाब होगा।.....
बात से बदलने वाले और जज़्बात से खेलने वाले इंसान से दूरी जितना बना के रखो उचित होता है...
खास कोई मिले मुझ से इस तरह की मुझ से जुदा ना हो .....!! वो समझे मेरे मिज़ाज़ को और मुझ से खफ़ा ना हो....!!
जिंदगी बड़ी महंगी चीज हैं,
इसे दो कोड़ी के लोगो पर बर्बाद मत करना…
सब लोग कहते हैं ..... " सीता और द्रौपदी के कारण हुई रामायण और महाभारत, किसी ने यह नहीं कहा नारी का सम्मान न करने अंत है रामायण और महाभारत " !!
गुस्से में केवल मेरे शब्द बदलते हैं
तुम्हारे लिए मेरा प्यार नहीं जान...
हो लेने दो बारिश हम भी रो लेंगे
दिल में हैं कुछ ज़ख़्म पुराने धो लेंगे
सदार आसिफ़
यदि लक्ष्य न मिले तो रास्ते बदलो लक्ष्य नहीं,
क्योंकि वृक्ष अपनी पत्तियाँ बदलते है जड़ें नहीं...
आदमी दुख में काम आना चाहिए,
ख़ुशी में तों हिजड़े भी नाचने आ जाते हैं...
मैं जानता हूं कहाँ तक उड़ान है उनकी,
ये मेरे हाथ से निकले हुए परिंदे है..
तुमने ही बदल दिए सिलसिले वफाओं के…वरना हमें तो आज भी तुम से अज़ीज़ कोई नही..!!
स्वभाभिमान से जीने की आदत डालिए और
कुछ फ़ालतू लोगों को सूची से ब्लॉक कर दीजिए..!!
इतरा रहे हो ज़िस्म पर नए हो इश्क़ में
रूह के तलबगार से पाला नहीं पड़ा
हम मान ही नहीं सकते की पुरूषों की भीड़ ने दो स्त्रियों को निवस्त्र कर दिया,
काश!..वहाँ एक भी पुरुष होता.
घर बटा बर्तन बटे सारी ज़मीनें बाँट लीं
बाप के मरते ही बच्चों ने पतंगें छाँट लीं
इक तरीक़ा ये भी था फल बाँटते वो उम्र-भर
भाइयों ने पेड़ काटा और लकड़ी बाँट लीं
मर्द की जेब में जब छेद हो जाता है ,
तो सिक्को से पहले रिश्ते गिर जाते है ...
प्रेम किसी भी स्थान पर
रहने की अनुमति दे सकता है
लेकिन दूसरे स्थान पर
रखने की नहीं,
प्राथमिकताओं का पालन आवश्यक है।
ये एक बात समझने में रात हो गई है
मैं उस से जीत गया हूँ कि मात हो गई है
तहज़ीब हाफ़ी
बड़े बड़े युद्ध अक्सर
शांत कमरों में अकेले लड़े जाते हैं !
रिश्तेदार भलें ही हाल-चाल न पूछें ,
पर स्टेट्स पर कड़ी निगरानी रखते हैं