तुम जहां रहो खुश रहना बेटा मैं अपना काम चला लूंगा…
कोई पूछेगा तो व्यस्त है बच्चा कह के इज्जत बचा लूंगा…
हाथ पांव चलते रहेंगे तो बस कुछ साल और निभा लूंगा…
पैसा जरूरी है भविष्य के लिए मैं सब को यह...
कैसे जुदा कर दे उसे अपने आप से,उसके नाम का एक अक्षर मेरे नाम में भी आता है !
एक समंदर
मेरे अंदर
मस्त कलंदर...
उछल रहा है
उछल उछल कर
निगल रहा है
वक्त को
वक्त की बेवजह
पाबंदीओं को…
अंदर के
समंदर से
कभी
वक्त
कहां बड़ा हो पाया ❓
मैंने मुझको
हमेशा
वक्त से
बड़ा पाया
इस लिए
अंदर के समंदर में
वक्त को
डूबता पाया।।
सूरत नहीं देखी जाती, सीरत देख लोजिस्म का क्या करना जब रूह एक हो
सिलवटें उतर गई थी चेहरे कि, खुशियों के इंतज़ार में,
मगर मुफलिसी अपनी ऐंठ में, दस्तक लगाए बैठी रही..!!
आखिर में ज़िंदगी चंद सवाल,
और कुछ जवाब बनकर रह जाती हैं...
"मर्यादाओं" के सारे द्वार तब शर्मशार हो जाते हैं,
जब "दुशासन" जैसे महानीच अस्मत को ढाल बनाते हैं,
और वो महिमा थी द्वापर की, जो लाज बची थी "द्रौपदी" की,
अब कौरव निर्वस्त्र भी कर दें तब भी "कृष्ण" नहीं आते हैं..!!
विरक्ति
शतरंज सी जिन्दगी में कौन किसका मोहरा है
आदमी एक है मगर सबका किरदार दोहरा है
फूलों की दुकानें खोलो खुशबू का व्यापार करो,इश्क खता है तो ये खता एक बार नहीं सौ बार करो !
शाखें तराशने से ना बनेगी कोई बात,
नफ़रत के सारे पेड़ जड़ों से उखाड़ दो.
किसी को छल कर ग़र तुम ख़ुश हो रहे हो,
तो ये तुम्हारी सबसे बड़ी नाकामयाबी है।
कि मरने के बाद भी मेरी आंख खुली रही,आदत जो पड गई थीं तेरे इंतज़ार की...
सहनशील होना अच्छी बात है,
परन्तु अन्याय का विरोध करना उससे भी उत्तम है !
वो जो है ही नहीं हक़ीक़त में
उससे कैसे कहें के घर आए
आसमां पे उसे निहारेंगे
जिसको मिट्टी में दफन कर आए
तुमसे मेरा प्रेम कुछ ऐसा रहेगा,दुनिया उदाहरण दे हमारा, वैसा रहेगा.
सुनो,,
तुम कबूल तो करो इश्क मेरा,,
मैं खाना बनाना भी सीख लूंगी।।
हर बात पर शुक्र करना ये भी अल्लाह पाक की
नेमत है, कयोंकि अल्लाह पाक शुक्र करने की
तौफीक उन्हीं को देता है, जिससे वो राजी होता है
मोहब्बत कमज़ोर दिलों का काम नहीं !!!
रूहें कांप जाती हैं जब यार जुदा होता है !!
एक परवाह ही बताती है ख्याल किंतना है
वर्ना कोई तराज़ू नही होता रिश्तों में....