जैसे ही जमाना बदलालोग बदलने लग गये,अब कोई दिल्लगी नहीं करतासबको चाहिए बस कोईवक्त बिताने के लिये…
कुछ भी मेरा नहीं मेरे पास,
बद्दुआ भी लोगों की दी हुई है....
मत पूछ मेरी बेबसी का सबब क्या है,
पहले पिघलाया फिर पत्थर किया था..!!
सुबह शाम तू मेरी इबादत सा लगे
जो कभी ना छूटे वो आदत सा लगे
रिश्ते फुरसत के नही ,
वफादारी और स्नेह के मोहताज होते हैं।
जितनी शिद्दत से तुझे चाहा था
तूझे भूलने में उतनी ही ज़हमत उठानी पड़ रही है..
तुमने तोड़ा है इतने टुकड़ों में मुझे तुम क्या जानो खुद को समेटने में कितनी मशक्कत उठानी पड़ रही है..
ना रातों को चैन है ना दिन...
बुद्धिमान लोग हर चीज पर सवाल उठाते हैं,
मूर्खों के पास हर बात का जवाब होता है।
किसी के साथ ऐसी बहस मत करो,
की बहस जीत जाओ मगर रिश्ता हार जाओ
“मेरे देश के रिश्ते कमाल हैं, मेरे देश का दान-धर्म कमाल हैं, मेरे देश का खून कमाल हैं…”, यह कहना है, मेरी एक विदेशी दोस्त का।आप बताएं के हमारे देश में और क्या-क्या कमाल हैं? भारत देश महान है ❣️
अच्छे संस्कार किसी मॉल या बाजार में नहीं,
परिवार के माहौल से मिलते हैं...
मैं किसी शख़्स से बेज़ार नहीं हो सकता
एक ज़र्रा भी तो बेकार नहीं हो सकता ।
तभी तक पूछे जाओगे जब तक काम आओगे
चिरागों को जलते ही बुझा दी जाती है तीलियां .!!
जिंदगी के रास्ते में सफर के मज़े लो,मंजिल तुमसे खुद किसी मोड़ पर टकराएगी ।
फस गया हूँ जिंदगी के कुरुक्षेत्र में अभिमन्यु की तरफ ,
बचाने कोई आने वाला नही और मैदान मैं छोड़ूंगा नही...
क्यूँ हर दफ़ा ख़ुशियों की क़ीमत आंसुओं से चुकानी पड़ती है..?
किसी के हाथों की कठपुतली बनने से अच्छा है..
कि छोटा ही सही अपना किरदार खुद बनाओ..!!
ऐ खुदा, मेहनत कि दो रोटियों पर ये तेरी कैसी खुदाई है,
जिम्मेदारियों को बीच में छोड़ एक गरीब ने जान गंवाई है..!!
न चाहते हुए भी किताबों से,
हमेशा दोस्ती रखनी पड़ेगी।
हम किताबी कीड़े है मेरी जान!,
हमसे मोहब्बत महंगी पड़ेगी।।
भुला दिए जाने से ज़्यादा,आश्चर्य देता है अचानक याद किया जाना…
संघर्षों की समर भूमि में, हमसे पूछो हम कैसे हैं, कालचक्र के चक्रव्यूह में, हम भी अभिमन्यु जैसे हैं। हरिओम पंवार