World's Best Cow Hospital English हम खुद अकेले रह गये ,सबका साथ देते देते। ज़िंदगी जोड़ घटाव से नहीं, प्रेम और लगाव से है। तेरे वजूद से हैं मेरी मुक़म्मल कहानी, मैं खोखली सीप और तू मोती रूहानी...!! कभी मिलो तो कुछ देर बैठेंगे..अधूरी शिकायतों को आजादी भी देनी है..!! जिनके ऊपर जिम्मेदारियों का बोझ होता है उनके पास रुठने और टूटने का वक्त नहीं होता.. दुख उत्पन्न करने वाली चीजों से दूर रहो ! उड़ने का शौक अगर जुनून बन जाए,मजबूरी भी मजबूर होके घुटने टिका देती है ना होने का एहसास सबको है, मौजूदगी की कदर किसी को नहीं… खुशियां खत्म हो चुकी मेरे जीवन से, मैं अवसादों का रहगुजर हूं, और जिसे कोई नहीं तराश सकता, मैं वो मानव निर्मित पत्थर हूं.. उसके आने की उम्मीद ही नही तो उसकी आदत कैसी.. जब वो अपना ही नही तो शिकायत कैसी.. तलवार का दौर गया, अब लोग तानों से मार देते हैं… फ़िक्र में जिसकी ज़माना छोड़ दो तुम,वो तन्हा छोड़ने में ज़रा भी देर नहीं करता..! मुकम्मल हो गर इश्क़ तो तेरे सारे नखरें झेलूं मैं, तुझे लेकर अपनी आगोश में तेरी जुल्फों से खेलूं मैं..!! विरक्ति तुम्हें मांगने के बाद, सबकुछ तुम्हारे लिए मांगा है... हर बार के मिलने में तक़ल्लुफ कैसा , चाँद सौ बार भी निकले तो नया लगता है ।। रूठे हुओ को मनानाऔर गैरो को हसाना हमे पसंद नही... अरे नासमझ है, नादान है, वो मन कि कच्ची हैं अभी, पढ़ ना सकी कसीदे मेरे इश़्क़ के, शायद वो बच्ची हैं अभी..!! विरक्ति हम अपनी कहानी के लेखक खुद है .. जब मन करेगा तब चैप्टर बदल देगे...!! काँच के टुकड़े बनकर बिखर गयी जिंदगी किसी , ने समेटा ही नहीं हाथ जख्मी होने के डर से !! अंध कक्ष में बैठ रचोगे ऊँचे मीठे गान या तलवार पकड़ जीतोगे बाहर का मैदान। रामधारी सिंह दिनकर Prev1…129130131…236Next Concept, Created & Designed by sureshjain.com © copyright 2025. sureshjain.com All Rights Reserved.