सुनो लड़कियों घर से भागो
प्रेमी के साथ नहीं।
इतिहास
भूगोल
विज्ञान
साहित्य की किताबें लेकर,
जब इन किताबों को सीढ़िया बनाकर
मारियाना की गर्त से लेकर,
चांद पर पहुंच जाओगी।
तब कोई भी प्रेमी भगाएगा नहीं
बल्कि
ख़ुद ही चोरी छिपे किताबें देगा
बजाय फूल और झूठी प्रसन्नता के।
हे मेरी माँ..आपकी छत्रछाया है ,न कोई मोह माया है ,बारिश से ज्यादा तो मुझको ,आपकी यादों ने भिगाया है…!!!!
दुनिया के महंगे से महंगे ऐशो आराम भी ,
मां की गोद सा सुकून नहीं दे पाते हैं ।।
रूपया व्यक्ति का,
रवैया बदल देता हैं।
हर रिश्ता इसी कागज़ का गुलाम हैं..जिसे हम पैसा कहते हैं..
मेरे लफ्जों को थोड़ा ध्यान से पढ़ा करो मैंने सच में जिंदगी बर्बाद की है .....!!
कठिनाइयां मनुष्य को जितना सीखा सकती हैं..
दस गुरु मिलकर भी उतना नहीं सीखा सकते.!!
इतना भी मत वफ़ादार बनिए कि लोग पालतू समझ बैठें।
अपने आप में शांति पाने के लिए, तुम्हें विचारों के बंधनों से मुक्त होना होगा !
मन तो सबके पास होता है, लेकिन मनोबल" कुछ लोगों के पास ही होता है..!!
सही वक्त पर करवा देंगे हदों का एहसास,
कुछ तालाब खुद के समंदर समझ बैठे हैं...
न दिन होता है अब न रात होती हैसभी कुछ रुक गया हैवो क्या मौसम का झौंका थाजो इस दिवार पर लटकी हुई तस्वीरतिरछी कर गया है….
यदि आपका कोई दुश्मन नहीं है,
तो इसका अर्थ है कि आप उन जगहों पर भी ख़ामोश रहे,
जहाँ बोलना बहुत ज़रूरी था।
“मनुष्य का ह्रदय अभिलाषाओं का क्रीडा स्थल और कामनाओं का आवास है”
मुंशी प्रेमचंद
न जी भर के देखा न कुछ बात की
बड़ी आरज़ू थी मुलाक़ात की
मसला सुकून का है,
जिंदगी काट तो हर कोई रहा है !
वो मंदिर भी जाती है ,वो मस्जिद भी जाती है
बेटा बीमार हो तो मां मजहब भूल जाती है
समाज की नज़र में दारू पीने वालेअमीर आदमी हैं तो ड्रिंक करता हैमिडिल क्लास हैं तो शराब पीता हैगरीब आदमी है तो वो बेवड़ा है
कहीं चाँदी की है चम्मच
और रेशम के खिलौने हैं
कहीं काँटों का है बिस्तर
और बस सपन सलोने हैं
सुधीर...
आदतें अलग है हमारी ज़माने से...रिश्ते कम ही सही लेकिन दिल से रखते हैं..!!