काश मेरी किस्मत….कोरे कागज जैसी होती…..जिस पर मैं रोज खुद लिख पाती…!!
वक्त का तकाजा देखिए
महसूस कीजिए
हो रहा रदोबदल
कुछ अच्छे कुछ बुरे
महसूस तो कीजिए
दौर था सुनहरा
आपस की सहभागिता
एक दूजे का साथ
न जातीय विभेद
बदला बदला आबो हवा
बढ़ गई दूरियां
अलग थलग राग लिए
जातीय...
जब डूब रही थी कश्ती और दूर था किनारा,
तब भी भरोसा सिर्फ खुद पर था हमारा....
तेरे हुस्न को परदे की क्या जरूरत,,,
कौन होश मे रहता है तुझे देखने के बाद,,,
मोहब्बत में कहाँ कोई उसूल होता है❤️❤️दिल जिसे चाहे बस वही कुबूल होता है
"कुछ अजीब सा चल रहा है ये वक्त का सफर ,एक गहरी सी खामोशी है खुद के ही अंदर !!
अल्फ़ाज़ नहीं रहे शेष अब, विचारधारा भी है शून्य,
मस्तिष्क में है उथल-पुथल, आवेश भी लगता पुन्य..!!
विरक्ति
मेरे दोस्त गिरगिट की नस्ल के थे
एक एक करके सबने रंग दिखाए
खुद की पहचान बनाने में जोमजा़ है, वह किसी की परछाईबनने में नहीं।
मेरे पास से जो गुजरा, मेरा हाल तक ना पूछा
मैं कैसे मान जाऊँ कि वो दूर जाके रोया
परवीन शाकिर
बिजली विभाग तो यूंही बदनाम है
काटना तो कोई तुमसे सीखे...
मेरी अर्जी यही है मेरे बालाकृपा बरसाये रखनामत छोडियो ना मेरा साथदया तुम बनाये रखना
कभी बदन दर्द, सिर दर्द तो कभी उनकी सांस फूल जाती है,
बेटा अगर प्यार से गले लगा ले, तो मां हर दुख भूल जाती है..
समय जब विपरीत हो, तो शांत रहना ही सही होता है...
जो कभी साथ बैठ कर हंसे थे
आज नाग बनकर डंस रहे हैं....!!
मुझे पल भर के लिए आसमान को मिलना थापर घबराई हुई खड़ी थी…कि बादलों की भीड़ में से कैसे गुज़रूँगी…
इतना कामयाब हर इंसान को बनना चहिए,
की आपके होते हुए,
आपके मां बाप को किसी और के आगे हाथ न फैलाना पड़े!..
एक वही शख़्श मेरी हर कहानी हर किस्से में आया…जो मेरा होकर भी , न मेरे हिस्से में आया..!!
कुछ भी मेरा नही मेरे पास,
ये बदुआये भी लोगों की दी हुई है..