चराग-ए-इश्क कभी दिल से जलाया न करो , जलाओ तो जलाकर नफरत से बुझाया न करो, ............ गम ये नहीं के भूल गए तुम हमको... बात ये है के , इस कदर याद तुम आया न करो...!!
पत्नी की बातों को एक कान से सुनकर दूसरे कान से रोज़ निकालना भी,किसी योग से कम नहीं होता है.!
जिंदगी बस उन्हीं लोगों की रंगीन हैजो रंग बदलना जानते है
"कुछ लोग पाँवों से नहींदिमाग़ से चलते हैंये लोगजूते तलाशते हैंअपने दिमाग़ के नाप के।"
नरेश सक्सेना
मन को मना लेना ही ठीक हैक्योंकि हर ज़िद खुशी नही देती ..
अजीब है..
औरत खुल कर हंस नहीं सकती बद किरदार कहते हैं,
मर्द खुल कर रो नहीं सकता कायर कहते हैं..
कर्ता करे न कर सकै , शिव करै सो होय ,
तीन लौक नौ खंड में, महाकाल से बड़ा ना कोय
अमीरों में अभी वो शुमार नहीं
ग़रीबों का मसीहा नया नया है
आँखों से जो बह रहा कहो न इसको नीरपलकों से ही छलक गयी हृदय कलश की पीर …!!
किसी जगह पर पहुँचने के लिए,
किसी जगह से निकलना भी पड़ता हैं...
सारे ही काम जरूरी थे जिंदगी में और होते भी गए
एक खुदा तेरी इबादत ही थी जो हर बार टालती गयी
सुबह का मतलब केवल सूर्योदय नहीं होता,
यह सृष्टि की खूबसूरत घटना है,
जहाँ अंधकार को मिटाकर
सूरज नई उम्मीदों का उजाला फैलाता है।
पहाड़ पर चढ़ो तो पहाड़, पहाड़ नहीं रह जातानदी पार कर लो तो नदी, नदी नहीं रह जाती
लेकिन आदमी कोजितना समझते जाओउतना वह मुश्किल होता जाता है।
~ विष्णु नागर
पैसों के अलावा अब किसी के
आने जाने से फर्क नहीं पड़ता।
मैं तो वक्त से हारकर सर झुकाये खड़ा था,
और सामने खड़े लोग खुदको बादशाह समझने लगें...
सुनो दोस्तों पैसा इतना कमाओ की,
चार लोग तुम्हे अपना दामाद बनाना चाहे...
तेरी यादों ने रखा है हर वक्त बेचैन मुझे ,
ये दिसंबर भी कट रहा है तुझे याद करते करते ...
शहर से अच्छा तो अपना गाँव है,
जहाँ हम मकान नम्बर से नहीं
‘पिता’ के नाम से पहचाने जाते हैं.
शीघ्रता में विवाह करने पर
हम फुरसत से पश्चाताप करते हैं।
विलियम कांग्रीव
ये गंदगी तो महल वालो ने फैलाई है “साहिब”
वरना गरीब तो सङको से थैलीयाँ तक उठा लेते है !!