जब जब लोगपरेशान हो जाते हैं..काफ़ी हद तक वोइंसान हो जाते हैं...
अपने शब्दों को उठाओ आवाज को नहीं ,वह बारिश है जो फूल उगाती है तूफ़ान नहीं !!
तेरे !!! सजदे मे सर रख के मौला मेैंअपने सारे गमों को भूल जाता हूं…
शहर से
सम्भावनाएं जुड़ी हैं ,
गॉंव से
भावनाएं जुड़ी हैं ।
एक गुमनाम सा किरदार,
हमारा भी हैं कहीं,
जज्बात तो बहुत हैं,
मगर हक एक भी नहीं,
करना तो बहुत कुछ हैं किसी एक की खातिर,
मगर मन इसी कश्मकश में हैं कि उनके जीवन में,
हमारा कोई अस्तित्व भी तो नहीं कही ..
सिर्फ मेरा दिल ही जानता है कि
ये तुम्हें खोने से कितना डरता है
संघर्ष प्रकृति का निमंत्रण है,
जो स्वीकार करता है वही आगे बढता है....
तुझे देखते ही मेरा खिलना एक तरफ, घर पे झूट बोल के तूझसे मिलना एक तरफ...
ना पूछ मेरे सब्र की इन्तहा कहाँ तक है..तू सितम कर ले तेरी ताक़त जहाँ तक है..!!
सफलता चाहिए तो
खुद को बस में रखो ,दूसरों को नहीं !
सारे जग की उम्मीदों से
निज स्वार्थ बड़े जब हो जायें
पद हेतु, शत्रु के पाले में
कुछ मित्र खड़े जब हो जायें
तब दिल पर पत्थर रखकर
उनसे हाथ छुड़ाना पड़ता है
निज संबंधों को भूल
पार्थ को शस्त्र उठाना पड़ता है
फंस गया तुम्हारा...
रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय।
टूटे से फिर ना जुड़े, जुड़े गाँठ परि जाय॥
रहीमदास
भीड़ में सभी लोग अच्छे नहीं होते..
और अच्छे लोगों की कभी भीड़ नहीं होती..!!
मोहोब्बत, इबादत से आगे की शय हैकि हमने ख़ुदा को सनम कर लिया है
~ भास्कर शुक्ला
दर्द
अपमान
ठोकर
और धोखा इंसान को पूरी तरह बदल देते हैं !
पिता तारीफ व्यक्त करते हैं सिर्फ ' मुस्कुराहट ' से, शब्दों से उनका कहाँ नाता है ?? ~ सेजल
तमाशा ये चार दिन का नहीं ,
वतन से मुहब्बत हमें पैदाईशी है।।
मेरा मुझ में कुछ नहीं, जो कुछ है सो तेरा।
तेरा तुझकौं सौंपता, क्या लागै है मेरा॥
कुछ होगाकुछ होगा अगर मैं बोलूँगान टूटे न टूटे तिलिस्म सत्ता कामेरे अंदर एक कायर टूटेगा -टूट मेरे मन टूटएक बार सही तरहअच्छी तरह टूटमत झूठमूठ - ऊब मत रूठमत डूब, सिर्फ टूट
~ रघुवीर सहाय
आदमी केवल दिमाग की नस फटने और दिल की धड़कन रुकने से नहीं मरता, बल्कि उस दिन भी मर जाता है जिस दिन उस की उम्मीदें और सपने मर जाते हैं; उसका विश्वास मर जाता है इस तरह आदमी मरने...