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मेरे बग़ैर तुम्हारा गुज़ारा कैसे होगामेरे जैसा कोई तुम्हारा दोबारा कैसे होगा

तुम्हारी नूर के दीदार को ,कहाँ रोक पायेगा हिजाब।दिल मेरा कहता है,क्यों ना दे दूँ तुम्हें,जन्नत की हूर का ख़िताब।।

हमेशा याद रखना एक हारा हुआ व्यक्तिदूसरे प्रयास में अक्लमंद के साथ खतरनाक होता है..!!

बाप की आँखों से गिरने वाला एक आंसू आपको तमाम उम्र रुला सकता है

जीत की आदत अच्छी होती है मगर, कुछ अपनों के लिए हार जाना भी बेहतर होता है..!!

हाल मत पूछो जिंदगी का हमसे ,हालात इस कदर गुमनाम है ,की उम्र जीने की है औरमौत आस पास खड़ी है…!!

वो अपने ही होते हैं जो लफ्ज़ों से मार देते हैं !

संघर्षों की समर भूमि में, हमसे पूछो हम कैसे हैं, कालचक्र के चक्रव्यूह में, हम भी अभिमन्यु जैसे हैं। हरिओम पंवार

तुम रूठना तो ऐसे रूठना जैसे माॅं रूठती ही माॅं मेरी सुबह की बात शाम तक भूल जाती है... सपना गर्ग

हम ही पत्थर के हो गये ये सोचके.. कि ज़िंदगी तो फूल बनेगी नहीं...!!

अगर कभी वक़्त में उनसे मुलाक़ात होगीसिर्फ़ रस्म निभाने की शायद वो क़वायद होगीहँसी आती है मुझको अब दरमियाँ आयेवजहों पर ,के अब एक अजनबी बन कर पहचान होगी…

लड़खड़ाये कदम तो गिरे उनकी बाँहों मे , आखिर हमारा पीना ही आज हमारे काम आया

पहले कच्चे घरों में स्वर्ग की अनुभूति हुआ करती थी अब शीश महल में अपनेपन का स्पर्श नहीं मिल पाता

पढ़ाई चल रही है ज़िंदगी कीअभी उतरा नहीं है बस्ता हमारा !!

सभ्यता का युग तब आएगा, जब औरत की म़र्जी के बिना कोई, औरत के जिस्म को हाथ नहीं लगाएगा। ~ अमृता प्रीतम

सुकून अगर पैसों से खरीदा जाता न साहब तो प्रेम का कोई अस्तित्व ही ना होता…❤️

फासला इसलिए रखा मैंनेक्योंकि तुम करीब थे हर किसी के…..!!

तमाशा ये चार दिन का नहीं , वतन से मुहब्बत हमें पैदाईशी है।।

लहज़े में उद्दंडता, खून में उबाल,जुबां पर ज़हर, अक्ल कम थी,आयी जब ज़िम्मेदारी तोमुंहपर झूठी मुस्कान और आंखे नम थी

"जिंदगी में इतना काबिल बनो" कि भगवान किसी गरीब की मदद करने के लिए तुम्हारी जेब का इस्तेमाल करें !


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