ये मत पूछो पहचान कहां तक है ,
तू बदनाम कर तेरी औकात जहां तक है..
ये शबनमी लहजा है आहिस्ता ग़ज़ल पढ़ना
तितली की कहानी है फूलों की ज़बानी है
उस इंसान का मंजिल से भटक जाना तय है,
जिसकी संगत में नकारात्मक लोग रहते हैं..!
हमें प्रेम करना चाहिए, न कि प्रेम में गिरना चाहिए,क्योंकि जो कुछ भी गिरता है, वो टूट जाता है.
वो ख़्वाब रात काचाय साँझ कीबारिश की बूंदें रूमानीवही समां पुरानाधड़कनों से बतियानाबदला नहीं है कुछ भीवही मिज़ाज़ आशिकानाचलो निभाते हैं हम तुमवही पुराना याराना लेकर चुस्कियाँ चाय कीकरेंगे गुफ्तगू शायराना
लड़का अगर बेरोजगार होकर घर बैठ जाए
तो दूसरे ही नहीं अपने भी नफ़रत" करते हैं
पहाड़ तोड़ने का साहस तो हर इंसान में है, पर वो डरता है "कामयाबी" के पहले पागल घोषित किए जाने से।
शब्द ही नहीं, खामोशी भी चुभती है।
हमें पता है तुम कही और के मुसाफ़िर हो
हमारा शहर तो बस यूं ही रास्ते में आया था
मेरे लिए वर्तमान ही सब कुछ है। भविष्य की चिंता हमें कायर बना देती है,भूत का भार हमारी कमर तोड़ देता है।
~ मुंशी प्रेमचंद
जितने ख़राब हालातो से आप लड़ेंगे ,
कामयाबी उतनी ही बड़ी होगी....
मत पूछ तेरे लिये हम कितना तड़पते थे,
आंसू छिपाकर अपने अंदर से बिलखते थे..!!
न्याय और नीति सब लक्ष्मी के ही खिलौने हैं।
इन्हें वह जैसे चाहती हैं, नचाती हैं।
गम से खाली नहीं जिस्म का कोना कोई हम रहे न रहे हम पे मत रोना कोई..!!
किसी को इश्क़ विश्क करना हो तो बता देना,
आज और कल बिलकुल फ्री हूं मैं...
बांधकर "विरह" की बेड़ियों से मुझे "आईना" दिखाया था,
मैं "गधा" हूं "इंसान" नहीं ये बात उसने मुझे सिखाया था..!!
विरक्ति
जिंदगी पर भरोसा कीजिए, भरोसे पर जिंदगी नहीं...
जुबां पर भीख रहती है हलक पर चीख रहती है,
ना पैदा हो कभी बेटी हैवानों कि सीख रहती है..!!
विरक्ति
दौलत तो विरासत में मिल सकती है,लेकिन पहचान अपने दम पर बनानी पड़ती है !