इंतज़ार मत करो
जो कहना हो कह डालो
क्योंकि हो सकता है
फिर कहने का कोई
अर्थ न रह जाए।
तमीज़ बताती है परवरिश आपकी, आप पढ़े लिखे हैं तो क्या हुआ
कुछ रिश्तों से आप लड़कर नहीं, बल्कि थक कर जुदा होते हैं....!!
किसी पीर से पूछो ना किसी फ़क़ीर से पूछो, तुम अपने बारे में सिर्फ अपने ज़मीर से पूछो....!!
मुंह पर बोलूं तो खटकता हूं लोगो को,
चुप रहू तो अन्दर की बगावत मार देती है।
तेरे लौटने के इंतेजार में,तेरी यादों से मोहब्ब्त हो गई….
जीवन अपूर्ण लिए हुएपाता कभी खोता कभीआशा निराशा से घिराहँसता कभी रोता कभीगति-मति न हो अवरूद्धइसका ध्यान आठो याम हैचलना हमारा काम हैइस विशद विश्वप्रहार मेंकिसको नहीं बहना पडासुख-दुख हमारी ही तरहकिसको नहीं सहना पडाफिर व्यर्थ क्यों कहता फिरूँमुझपर विधाता...
आज के ज़माने के शुभचिंतक ऐसे होते जा रहे हैं,
जो आपका शुभ होते चिंतित हो जाते हैं!
कुछ तो राज छुपाएं जातें हैं मोहब्बत में यूं ही
कोई तीसरा अचानक से नहीं आ जाता जिंदगी में
मेरे दोस्त सोचने से कहांमिलते हैंतमन्नाओं के शहरचलना भी जरुरी हैमंजिल को पाने के लिए
आते नहीं हैं लोग असल किरदार में कभी, यहाँ एक से बढ़कर एक अदाकार हैं सभी
बदला लेने में वो मज़ा नहीं जो ,खामोशी से बदल जाने में है …
ज़िन्दगी Whatsapp के Last Seen जैसी है !
आपको अपनी छिपानी है दूसरों की देखनी है !!
तुम्हारी नोजरिंग पर कविता लिखने बैठता हूं तो कलम टूट जाती है.
जिनके ऊपर जिम्मेदारियों का बोझ होता है
उनके पास रुठने और टूटने का वक्त नहीं होता..
कैसे कह दूं कि वो दूर है मुझसे
हम दोनों एक ही आसमां के तले तो रहते हैं
ये तुम्हारी यादें भी चैन नहीं लेते देतींदेखो सुबह से मज़दूरी पर लगा रखा है..!
कितने बीघे बिक गए बेटी को पढ़ाने में,
बेटी ने कपड़े खोल लिए रील बनाने में.....
सफल रिश्तों के यही उसूल हैं,बातें भूलिए, जो फिजूल हैं…
क्या तुम..
नही मिलोगी
यह पूछतीं हैं मुझसे
बेचैन सांसें
मैं बस टकटकी लगाकर
सुनसान सड़क के
उस मोड़ को देखता रहता हूं
जहां से तुम ओझल हो गई थी
इस आस में..
कभी तो समय की ये बेरहम धुंध छटेगी
और तुम..
लौट आओगी...