मैं तुम्हरे साथ हूं कहने में और,रहने में बहुत फर्क होता है….
मेरा हौसला बसता है मेरे यार में
वो साथ हो तो है सब इख़्तियार में
वक्त अच्छा हो तो लोग हाथ पकड़ते हैं ,और वक्त खराब हो तो गलतियाँ पकड़ते हैं ...
जिंदगी बसर करनी है तुम्हें सांपों की बस्ती में,फन कुचलने का हुनर सीख लेना वरना ड़से जाओगे.
अपने मतलब के लिए,अपना बनाते हैं लोग!
चराग़ों को आँखों में महफ़ूज़ रखना
बड़ी दूर तक रात ही रात होगी
तुम सिर्फ सोचो और वो मिल जाएजिंदगी इतनी सस्ती चीज नही है !
सब कुछ होता है लोगों में ,
बस एहसास नहीं होता लोगों में...
अपनी अदाओं से मेरा दिल लहुलुहान करती हैं,
ये तेरी नकाबपोश आंखें मेरी जान ले लेती हैं..!!
विरक्ति
चाँद को छू के चले आए हैं विज्ञान के पँख
देखना ये है कि इंसान कहाँ तक पहुँचे
- गोपालदास 'नीरज'
न तू पूछ मुझसे, न मैं जवाब दूँगी तुझे,तू जानता है सवाल मेरा, मैं जानती हूँ जवाब तेरा...
कुछ पीड़ाओं में ध्वनि नहीं होती ,
लेकिन उनकी गूंज अनंत तक होती है...
हम वहाँ हैं जहाँ से हम को भी
कुछ हमारी ख़बर नहीं आती ।
नहीं पढ़ीं जातीं सम्पूर्ण कविता अब उनसे'दो' पंक्तियाँ दो उन्हें, किताबें वापस ले लो।
जंगल में जानवर मांस नोचकर खाते हैं,
जबकि
इंसानी बस्तियों के दो पैरों वाले भेड़िये,
देह के साथ आत्मा भी नोचकर खा जाते हैं ।
राजेश गौरी
फल हमेशा बीज से बड़ा होता है,
ठीक वैसे ही परिणाम भी कर्मों से बड़ा होता है !!!
कृष्ण में लीन मीरा
कृष्ण-प्रेम में मग्न है रहती
सुधबुध है खोई अपनी
बावरी कृष्ण-भजन में डूबी रहती
दरस की अभिलाषी मीरा
विष को भी अमृत मान है पी लेती
मोह कहाँ है उसे इस जग से
हर साँस वो गिरधारी को समर्पित करती
ऐसी है दर्श दिवानी...
दुख, फरेब, गरीबी और बदनसीबी को मापना सिखाता हूं,
अपनी कलम कि धार से, मैं समाज को आईना दिखाता हूं..
अंत में दुश्मनों के कहे शब्द नहीं,
दोस्तों की चुप्पी याद रहती है।
मार्टिन लूथर
किसी का मजाक और अपना पैसा
सोच समझकर ही उड़ाना चाहिए।