हालात कह रहे है अब वो याद नही करेंगेओर उम्मीद कह रही है थोड़ा और इंतजार करेंगे
अहमियत दी तो कोहिनूर खुद को मानने लगे,
कांच के टुकड़े भी क्या खूब वहम पालने लगे.
ऊपर वाले कर्म देखते हैं,और नीचे वाले दौलत…
जिंदगी उस दौर से गुज़र
रही जहां दिल दुखता है
और चेहरा हंसता है
इस रात के पैरों में किसने ज़हर ए खंजर बांधें है
रोज आशिकों की रूह पर नया निशान बनाती है
कुछ इस तरह लगना तुम गले मुझ से,
कि छीन लेना मन की उदासियां सारी .!
आखिर में ज़िंदगी चंद सवाल,
और कुछ जवाब बनकर रह जाती हैं...
एक उदास शहर में
कुछ किताबें थी
एक छत चार दीवारें थीं
कुछ दोस्त थे चाय के कुल्हड़ थे
गलियाँ थी किनारे थे
एक उदास शहर में
जहाँ वो थी और ज़िंदगी थी..
एक शिक्षक को चाहिए कि वह महान बनने से बचे,
जितना हो सके उसे सहज बने रहना चाहिए ।
ख़्वाहिशों पर पाबंदी ख़्वाबों पे पहरा है ,
कौन समझेगा दर्द मेरा कितना गहरा है।।
किनारा न मिले तो कोई बात नहीं,
दुसरो को डुबाके मुझे तैरना नहीं हैं...
हर प्रॉब्लम के दो सोल्युशन होते हैं:-
भाग लो... (run away)
भाग लो.. (participate)
पसंद आपको ही करना है...
आदमी केवल दिमाग की नस फटने और दिल की धड़कन रुकने से नहीं मरता, बल्कि उस दिन भी मर जाता है जिस दिन उस की उम्मीदें और सपने मर जाते हैं; उसका विश्वास मर जाता है इस तरह आदमी मरने...
काश मेरी किस्मत….कोरे कागज जैसी होती…..जिस पर मैं रोज खुद लिख पाती…!!
कुछ गुमनाम सा इश्क है ये मेराअधूरा था अधूरा है और अधूरा ही रहेगा..🥀
मत कर मायूस खुद को बुलन्दी से गिरने के बाद ,
राहे नई भी खुलती है तूफानो के गुजरने के बाद ..!!
'समय दुख काउपचार नहीं करताकेवल उस परपर्दे डाल देता है
जितने दिनबीतते जाते हैंउतने पर्देपड़ते जाते हैं'
~ पंकज चतुर्वेदी
तर्क किये बिना किसी भी बात को आँख मूंदकर मान लेना भी एक प्रकार की गुलामी है
भगत सिंह
किसी की गुलामी से लाख बेहतर हैं,
अपनी अपाहिज ज़िंदगी जीना...
मिट्टी के मटके और परिवार का मूल्य,
केवल बनाने वाले को ही ज्ञात होता है,
तोड़ने वाले को नहीं..!!