मैं मगन डमरू की धुन पर नाचूँ ।
तुम दशाश्वमेध' का राग हो जाओ।
मैं तुमको छूऊं जलकर राख हो जाऊं ।
तुम मणिकर्णिका की आग हो जाओ...
वो आइने में कैसे बर्दास्त करती होगी खुद को,
उसे तो धोखेबाज लोगो से सख्त नफरत थी..
मिलकर सबसे रहिए यारों,
लेकिन दबकर किसी से भी नही...
दुनिया के सारे
खुदा झूठे है ,,,,
भूखे को रोटी
दे नही सकते ,,,
बाद मरे
जन्नत का वादा है
त्रुटियों के बीच में से ही सम्पूर्ण सत्य को ढूंढा जा सकता है।
सिगमंड फ्रायड
हर इंसान अपनी जबान के पीछे छुपा है ,अगर उसे जानना है तो उसे बोलने का मौका दो …
गलतियाँ ज़रूर माफ कर देनी चाहिए,
पर चालाकियाँ नहीं……..
मेरा साया है मेरे साथ जहाँ जाऊँ मैंबेबसी तू ही बता ख़ुद को कहाँ पाऊँ मैं
सहयोग मुश्किल से मिलता है, और सालाह आसानी से.!!
तू ज़ाहिर है लफ़्ज़ों में मेरे
मैं गुमनाम हूँ खामोशियों में तेरी…
कुछ ग़म और कई उलझनें है
जो दौर है जिम्मेदारियों का तो ख्वाहिशों से भी रंजिशें है.
मै लेखक हू लेकिन मै उद्दंडता नही लिखता,देश को पृथक करने वाली उग्रता नही लिखता,इंसान हू मै इसलिए हिन्दू मुस्लिम नही लिखता,हिन्दुस्तान के गौरव पर चोट करती अशिष्टता नही लिखता,और इश्क चाहती है मेरी कलम मै दुष्टता नही लिखता,मै द्वेष...
जितनी शिद्दत से आप दुश्मनी निभाते हैं,
काश ! उतनी शिद्दत से दोस्ती भी निभाई होती...!
पत्थर में भगवान है, लेकिन इंसान में इंसान नहीं !
तुम लोगो की बुराई छुपाओकल क़यामत के दिन अल्लाह तुम्हारे गुनाह छुपाएगा,,,
कर्ता करे न कर सकै , शिव करै सो होय ,
तीन लौक नौ खंड में, महाकाल से बड़ा ना कोय
तमाशा ये चार दिन का नहीं ,
वतन से मुहब्बत हमें पैदाईशी है।।
जिंदगी का खेल भी कुछ कबड्डी के खेल जैसा ही है ,सफलता की लाइन टच करते ही लोग आपके पैर खींचने लग जाते हैं ...
जाने क्या बिगाड़ा है इस बनाने वाले नेहम बनते बनाते अनजान बन जाते हैं !!
अभी माचिस है तेरे हाथ में ,
तू जितने चाहे घर जला !
पर हवा के मिज़ाज से खौफ़ खा ,
कहीं तेरा घर भी न दे जला !!