रात तो वक़्त की पाबंद है ढल जाएगी,
देखना ये है चराग़ों का सफ़र कितना है।
वसीम बरेलवी
जिसके जाने से जान जाती थी
उसको मैंने खुद Block किया है
जिन्दगी संघर्षो का दरिया है इसे किस तरह,पार करना है ये सब अपना-अपना नज़रिया हैं…
एक तरफ है खामोशी एक तरफ है बरसो का इंतज़ार, फिर भी ऐसी मोहब्बत का एक अलग ही रुतबा और सुकून...
मुझको न गिनाओ मेरी कमियां क्या हैं,
जाओ .....आईना देखो ..
और अपने गुनाह गिनो..!
कभी उसे भी तो खले ना मिलना हमारा ,सिर्फ मैं ही क्यों रोयु ,याद करू और गिड़गिड़ाऊं ।।
और फिर मैने उसे जाने दिया..... मैंने सदिया बिताई थी उसकी प्रतीक्षा मे... दिन को दोपहर, दोपहर को शाम , शाम को रात , रात को दिन होने में युग लग जाते हैं ये मैने सिर्फ जाना , नहीं जीया...
मोहब्बत वो बेइंतहा करता है मुझसे सोकरता है ख़ुद बुराई , बता कर बुरा मुझे …
इंतजार किसका करें आखिर ,,हर किसी ने उम्दा तोहफे जो दिए।।
बुद्धि अगर स्वार्थ से मुक्त हो,
तो हमे उसकी प्रभुता मानने में कोई आपत्ति नहीं।
ना आज मिले , न कल मिलें...
शिव शम्भू तो हर लम्हें हर पल पल में मिलें..!!
हजारो विकल्प होते हुए भी, "किसी एक पर अडिग रहना ही " प्रेम " है।
प्राण देना प्रेम नहीं...किसी के प्राण बन जाना प्रेम है...।
महीनों की आहट में मोहब्बत करते हैं लोग ,,
और दिनों के रिवाज में रिश्ते निभाते हैं लोग..!!
इक्का चाहे कितना भी उछलें..
हुकुमत तो बादशाह ही करता है..!!
तूने उस मोड़ पर तन्हा कियाजहाँ लगता थातू है तो मुझे फिर और क्या चाहिए…..
सबका दिल जितने में क्या फ़ायदा, मजा तो बस एक के दिल पर कब्जा करने में है..
मरीज़ हमको दवाएँ बताने लगते हैं
बुरा हो वक़्त तो सब आज़माने लगते हैं
नए अमीरों के घर भूलकर भी मत जाना
हर एक चीज़ की कीमत बताने लगते हैं
मलिकज़ादा जावेद
शेरो शायरी कोई खेल नहीं जनाब ।।जल जाती है जवनियाँ लफ्जो की आग में ।।
एकांत से मुझें मोहब्ब्त हो चली हैं,तुम बड़ी देर से आये हो...