उसने पूछा मुझसे "आखिर चाहती क्या हो ?"हमने भी कह दिया "चाहने से चीज़ें मिलती है .. सुकून नही .."

धैर्य बनाकर रखें और मेहनत करते रहें,आपका किस्सा नहीं एक दिन कहानी बनेगी..!!

मंजिल इतनी पास होकर भी उनकी राहें गुम क्यूँ है?हम क्या इतने गैर है ख़ुदा..अगर नहीं तो मेरी दुआ में तेरी मंजूरी इतनी तंग क्यूँ है?

नत हूं मैं सबके समक्ष, बार-बार मैं विनीत स्वरऋण - स्वीकारी हूं - विनत हूंमैं मरूंगा सुखीमैंने जीवन की धज्जियां उड़ाई हैं। ~ अज्ञेय

पहाड़ पर चढ़ो तो पहाड़, पहाड़ नहीं रह जातानदी पार कर लो तो नदी, नदी नहीं रह जाती लेकिन आदमी कोजितना समझते जाओउतना वह मुश्किल होता जाता है। ~ विष्णु नागर

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