सोचती हूं, खुद से इश्क करूं मैं अबऔर खुद में ही मुकम्मल हो जाऊं
इधर- उधर झांकने के बजाय,खुद के मायने समझ जाऊं मैं अब
सुना है Google परसबकुछ मिल जाता हैअगर सकून मिले तोLocation भेजना मुझे…
ईद मुबारक !
जमीं से जुड़े लफ़्ज़ों में वोसमुंदर से गहरे सार लिखती है…
दिल में कैद लिए ख़ामोशीकलम से शोर बेशुमार लिखती है…
भूल चुके जिसे अपने सारेउन लम्हों को यादगार लिखती है…
तपती रेत को एक बंजारनभरे सावन सी बहार लिखती है…
यादो मे बसर हो रही थी ज़िन्दगीजब से आने का पैग़ाम आयापलपल बेकली इंतजारो का हुआ अंत हर आती हवा की सरसराहट पर भिनी खुशबू आने लगी उनकी मुन्तजिर निगाहे ढूंढ रही मोहब्बत-एकशिश की परवाहबरकत है उनकीकुछ श्रृंगार कर लें…तो...