उदास लम्हों में बस चाहिए अकेलापनदिलासा देते हुए लोग ज़हर लगते हैं अक्श समस्तीपुरी

तस्वीर तो है ही तुम्हारी है तारीफ-ए-काबिलउससे भी ज्यादा कातिल है होंठों के नीचे ये काला तिल🧚🏻‍♀️

देखना तुम्हारी भी शाम न हो जाए एक दिन..!!💔

इश्क के धागे से बांधा ही नहीं मैंने तुझे कभी…रूह के हर रेशे से जुड़ा है तेरा मेरा रिश्ता..!!

अब क्या ही काहू अपने मां के बारे में..मां के ताने और खाने का कोई जोड़ नहीं..!!

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