शहर में रहकर...वो सोशल मीडिया पे फादर्स डे का जश्न मना रहा था, उधर गांव मे एक बूढ़ा बाप आज भी टकटकी लगाए बैठा है !!

जरूरतें, ख्वाहिशे, ज़िम्मेदारियां, यूंही तीन हिस्सों में दिन गुज़र जाता है..

जो खुश नहीं होना चाहते उन्हें कोई खुश नहीं कर सकता और जो खुश रहने का हुनर जानते हैं उन्हें कोई खुश रहने से नहीं रोक सकता !!!

कुछ दर्द जो अंदर ही अंदर घुटते रहते हैं, आंखों से पानी बन निर्झर नदियों से बहते हैं । समझ ही नहीं पाती,किसी को नही कह पाती, इस जीवन से अब कुछ और नही चाहती ।

आज फिर चाय की मेज़ पर , एक हसरत बिछी रह गयी.... प्यालियों ने लब छू लिए, केतली देखती रह गई !!!!

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