राजा की जान 🦜 में है..

शीत लहर के स्पर्श से जब मन झंकार उठा मधु कूक कोयल से जब हृदय में ज्वार उठा तब शब्द हार पहन विरही मन मुख से कविता गान उठा

जो आपके दिल के जितना ज्यादा करीब होगा.. वो ज़ख्म भी उतना गहरा देगा...

जब रात है ऐसी मतवाली फिर सुबह का आलम क्या होगा….

बीवी मेरी शरारती होनी चाहिए क्योंकि शरीफ़ तो मैं खुद हूं

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