हवा ने किया ऐसे स्पर्श तनजैसे छू कर मन मीत गयाकुछ भरा हृदय प्रेम मगरदृग जल से कुछ रीत गया।

तू श्रृंगार क्यूँ नहीं करती तेरी सादगी जान लेती है

पिता का क्रोध कदापि आपका अवरोध नहीं, सही मार्ग पर चलने का अनुरोध है।

इंसानों की इस दुनिया में बस यही तो एक रोना है,,अपना दिल दिल होता है,दूजे का खिलौना है..!!

तस्वीरों पर फिल्टर इतना ही लगाएं कि मिलना पड़े!.. तो शर्मिंदगी ना हो…!

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