यकीनन जीत जाते तुमसे वफाओं की बात में, हम तो बस तुम्हारी रंजिशों से हारे थे... बेवजह ही तुमपर ऐतबार किया था ख़ता थी हमारी , के हम तेरे सहारे थे...!!
किसी को ख़ोकर उसकी कद्र की , तो क्या कद्र की...जिस्म से रूह निकल जाने पर वापस नहीं आती...!! "वैरागी"
गम से खाली नहीं जिस्म का कोना कोई हम रहे न रहे हम पे मत रोना कोई..!!
जितनी शिद्दत से तुझे चाहा था
तूझे भूलने में उतनी ही ज़हमत उठानी पड़ रही है..
तुमने तोड़ा है इतने टुकड़ों में मुझे तुम क्या जानो खुद को समेटने में कितनी मशक्कत उठानी पड़ रही है..
ना रातों को चैन है ना दिन...
मेरी ज़िन्दगी में कुछ ऐसे लोग भी आए जो साथ बैठ कर हंसते थे...और मेरे पीठ पीछे मुझे ही डसते थे..!!