डरता है ज़माना मुझसे..... जब मैं उसके पीछे और वो मेरे आगे चलता है..!!
गुज़रता हुआ वक्त क्या क्या सिखा देता है.….. कभी हँसना तो कभी रोना सिखा देता है वक्त है कभी जहर पीना तो,कभी जख्म सीना सिखा देता है...!
चराग-ए-इश्क कभी दिल से जलाया न करो , जलाओ तो जलाकर नफरत से बुझाया न करो, ............ गम ये नहीं के भूल गए तुम हमको... बात ये है के , इस कदर याद तुम आया न करो...!!
अब कोई मरहम काम नहीं करता उन ज़ख्मों पर, जो मुझे मेरी वफ़ा के बदले उससे इनाम में मिले थे..!!
मायूस भी नहीं है वो और खुश भी नहीं है, क्या बात है जो दिल को मजधार में ले आई.. रफ़्ता रफ़्ता खत्म हुए हम जो तेरे इश्क़ में अफसोस है कि मौत क्यों इक बार में न आई.. तुझे...