मैं लेखक हूं, हालातों पर लिखता हूं, जज्बातों पर लिखता हूं,दफन हुई ख्वाहिशें, किसी की चंद मुलाकातों पर लिखता हूं,समाज में फैल रहे द्वेष, अनैतिकता और गंदगी पर लिखता हूं,कभी कभी मुकद्दर से चोट खायी अपनी ज़िन्दगी पर लिखता हूं..!!

अहतियात बहुत जरूरी हैं, चाहे सड़कें पार कर रहे हो या हदे ..!!

क्या भला मुझको परखने का नतीजा निकला , ज़ख्म-ए-दिल आपकी नज़रों से भी गहरा निकला !!

लड़की सिर्फ अपने पसंदीदा लड़के को ही, छोटी छोटी बातो पे ताना मरती हैं ..

ये जो तुम लोग बिना बॉयफ्रेंड बाली लड़की ढूंढ रहे हो न ...? शास्त्रों में इसे पत्थर में से तेल निकालना कहा गया हैं

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