जो भी जितना साथ दे वो एहसान है, लंबा साथ तो सिर्फ़ ख़ुदा का होता है। लोग इतना ही निभा सकते हैं जितना उसका ज़र्फ़ था सो उतना निभा दिया उसने…
तुम्हारे लिए किताब का कोई हिस्सा है मोहब्बत
हमारे लिए ईमान का हिस्सा है मोहब्बत ।।
जबरदस्ती की नजदीकियों से ,सुकून की दूरी अच्छी ।
हमने जिनके लिए दुआ मांगी,वो गैरों की दुआओं के तलबगार निकले,
जिनकी ख़ातिर इक वक्त में खुदा थे हम,अब हम उनकी ही नज़रों में गुनहगार निकले
जिन्होंने कभी लाख अच्छाइयां गिनाई थीं मुझमे,अब हम उनकी खातिर महज़ बेकार निकले…!!
यूँ वादे करके जो मुकर जाते हो ..
क्या तुम भी सियासत वालों के घर जाते हो … ?