मैं क्यों मान लूं तुम नहीं हो मेरे हाथ की लकीरों में, किस्मते तो उनकी भी होती है ना जिनके हाथ नहीं होते
कुछ भी अच्छा सा रख लीजिए मेम, वैसे भी करना उसके विपरित है !!
जो मेरे ख़यालात से रूबरू नहीं, वो मेरी मोहब्बत के लायक नहीं.
हर लम्हा सांसें बुड्ढी हो रही है
जिंदगी मौत के साये में हैं फिर भी जिद्दी हो रही है
बेवफा को बेख़बर रखना मेरी मौत की खबर से
जमाने के लिए आंसू हैं वो अंदर हस रही है!!
सुन्दरता सस्ती चारित्र महंगा, घडी सस्ती समय महंगा....!!