जिंदगी बसर करनी है तुम्हें सांपों की बस्ती में,फन कुचलने का हुनर सीख लेना वरना ड़से जाओगे.

“प्रतिभा तो ग़रीबी ही में चमकती है दीपक की भाँति, जो अँधेरे ही में अपना प्रकाश दिखाता है।” ~ मुंशी प्रेमचंद

बारिश में भीग मन बावलाधीरे-धीरे पट हृदय के खोल रहाआंखों से चूम तन बावलामृग कस्तुरी बन स्वच्छंद दौड़ रहा

केवल स्वयं को ढूंढना है,बाकी सब Google पर है..!! ❤️

मैं हूँ पतंग-ए-काग़ज़ी डोर है उस के हाथ मेंचाहा इधर घटा दिया चाहा उधर बढ़ा दिया

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