जूते रगड़ कर बनाई गई पहचान और,जूते चाट कर बनाई गई पहचान में बहुत फर्क होता हैं।

छीन लेते हैं रंगत चेहरे की, बेटियों को जो बोझ समझते हैं,पहले छीन लेते हैं खुशियां उनकी, फिर हंसने को कहते हैं..!!

हालातों ने खो दी इस चेहरे से मुस्कान..वरना जहाँ बैठते थे रौनक ला दिया करते थे…

मुझे उम्र के उस पड़ाव तक तेरा साथ चाहिए,आखिरी निवाला हो मेरा हांथ तेरा चाहिए..!!

देखने के लिए सारा आलम भी कमचाहने के लिए एक चेहरा बहुत

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