जो देख के हँसता था हम जैसे फ़क़ीरों कोशोहरत की बुलंदी से उतरा तो बहुत रोया-रईस अंसारी

नाम लेती हो मेरा , बदतमीज ,तुम मुझे आप क्यूं नही कहती ।।

खुद में झांकने के लिए जिगर चाहिएदूसरों की बुराई करने में हर शख्स माहिर होता है!

इन्सान की ख्वाहिशों की कोई इंतिहा नहींदो ग़ज़ ज़मीं भी चाहिए दो ग़ज़ क़फ़न के बाद

भारत कृषि प्रधान देश था अब कुर्सी प्रधान देश है !!!

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