ख़बर नहीं मुझको ये कौन सा दर्जाएइश्क़ है,कि लफ़्ज़ सब मेरे हैं और ज़िक्र बस तुम्हारा है।

इक वक़्त था ,हम थे , तुम थे और बातें थीं,इक वक्त है ,हम हैं , तुम हो और यादें हैं…!!

वह पथ क्यापथिक कुशलता क्याजिस पथ पर बिखरे शूल न होंनाविक की धैर्य परीक्षा क्याजब धाराएँ प्रतिकूल न हों ~ जयशंकर प्रसाद

वो आईना भी कितना खुश क़िस्मत होगाजो हर सुबह तुम्हारा दीदार करता होगा….!!

ये गर्मी भी बिल्कुल तुम्हारे ही जैसी है……आजकल सुबह भी तुम्हारे जैसी है,थोड़ी तपिश तो थोड़ी चमक सी है,और सुबह के बाद शाम का इंतजारबिल्कुल तुम्हारे इंतजार के जैसा बेसब्री सा

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