कितनी गफलत में ज़िंदगी गुज़र रहा हूँ, मत पूछो।
चराग़ ढूंढ़ रहा हूँ, हाथ में अंधेरा लिए...
लोगों को खिलाना अच्छा है,
अपने अहंकार को खिलाना बुरा है...
मंज़िल के नशे में, मैं घर छोड़ आया।
वो मुझे नशे में देख कर घर ले आए।
अपनी ज़ात से तंग मैं सामान पीछे छोड़ आया।
मेरे खाली कंधे देख, वो रिश्तों का बोझ ले आए।
गुजरता है मेरा हर दिन, मगर पूरा नही होता,
मैं चलता जा रहा हूं, और सफर पूरा नही होता…!
अगर कोई हमेशा आपको व्यस्तहोने का दिखावा करता है तो वहव्यस्त नही किसी और के साथ मस्तरहता है, कितना भी याद कर लोकितना भी जता लो एक दिन खुदको ही लगेगा कि अब अपना रास्ताअलग ही सही है सूचना जनहित...