खामोश रहोगे
तो
सच परेशान भी रहेगा
और पराजित भी होगा ।
तेरे साथ लम्हें इतनी रफ्तार से गुज़रे
जैसे किसी बच्चे का दिन इतवार सा गुजरे!
सिर्फ सोचे है करके नहीं देखे,
मेरे सारे गुनाह अधूरे है !
शब्दों से तुम बन गए
पंक्तियों में मेरे ढल गए
स्याही में मेरे पिघल गए
रचना मेरी तुम बन गए।
हर छंद में तुम रम गए
मैं तुम पर अब क्या लिखूं?
मेरे गीत के नज़्म बन गए
जीने की वजह तुम बन गए।
स्वर लहरी तुम बन...