हम खुद अकेले रह गये ,सबका साथ देते देते।

तह बह तह जमती चली जाती है सन्नाटों की गर्दहाल-ए-दिल सब देखते हैं पूछता कोई नहीं

आदमी मुर्दे को पूजता है,अस्थियां पूजी जाती हैं।राख पूजी जाती है।लाशें पूजी जाती है।तिरस्कार होता है।और जीवंत का आदमी अद्भुत है।

टूटे हुए लोग,मुस्कुराते बहुत हैं...

थक गई हूँ जिम्मेदारियों से,,ज़िंदगी मुझे चंद पल तू सुक़ून के उधार दे..!!

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