लगाव कैसा भी हो,,आखिर मेंदुख का कारण हीं बनता है...!!
असत्य है ईश्वर नहीं मारताउसकी निर्माण सत्ता का भवन नहीं बिखरता एक पिता की मृत्यु परथरथरा कर रेत साधड़ाम से गिर पड़ता हैईश्वरीय सत्ता का भवनऔरप्रत्येक मां की मृत्यु परसंतान दृष्टि मेंमर जाता है ईश्वरक्योंकि मां ही ईश्वर का प्रतिबिंब...
घर में पड़ी दरार जब भरती नहींदीवार बन कर उठ खड़ी होती है।
कोई नहीं करता प्यार मुझसे,नफ़रतों का बन गया चेला हूं मैं,न साथी न हमदर्द, न कोई रहबर,दुनिया में बहुत अकेला हूं मैं.