घर में पड़ी दरार जब भरती नहींदीवार बन कर उठ खड़ी होती है।

कोई नहीं करता प्यार मुझसे,नफ़रतों का बन गया चेला हूं मैं,न साथी न हमदर्द, न कोई रहबर,दुनिया में बहुत अकेला हूं मैं.

आप सभी को ईद-उल-फितरकी बहुत बहुत मुबारकबाद

तपस्या अगर पार्वती की थी तो प्रतीक्षा शिव की भी रही होगी

मैंनेगुलाब कीमौन शोभा को देखा !उससे विनती कीतुम अपनीअनिमेष सुषमा कोशुभ्र गहराइयों का रहस्यमेरे मन की आंखों मेंखोलो !मैं अवाक् रह गया !वह सजीव प्रेम था !मैंने सूंघा,वह उन्मुक्त प्रेम था !मेरा हृदयअसीम माधुर्य से भर गया !

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