पहले ख़ुद पर ध्यान दो…बाद में दूसरों को ज्ञान दो … !!!

आज शायद मुझे लगाले वो गलेईद का तो बहाना उसके पास है

शोहरत की बुलंदी भी पल भर का तमाशा है जिस डाल पे बैठे हो वो टूट भी सकती है

उदासी में कुछ पल जन्नत में जिओगे क्या,चाय बना रहा हूं अदरक वाली पिओगे क्या ?

विरह की वेदनाओं को मुस्कान तले दबाने वाले पुरुषसमाज में जिम्मेदार और प्रेम में बेहद लाचार होते हैं !

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