शोहरत की बुलंदी भी पल भर का तमाशा है जिस डाल पे बैठे हो वो टूट भी सकती है

उदासी में कुछ पल जन्नत में जिओगे क्या,चाय बना रहा हूं अदरक वाली पिओगे क्या ?

विरह की वेदनाओं को मुस्कान तले दबाने वाले पुरुषसमाज में जिम्मेदार और प्रेम में बेहद लाचार होते हैं !

लगाव कैसा भी हो,,आखिर मेंदुख का कारण हीं बनता है...!!

असत्य है ईश्वर नहीं मारताउसकी निर्माण सत्ता का भवन नहीं बिखरता एक पिता की मृत्यु परथरथरा कर रेत साधड़ाम से गिर पड़ता हैईश्वरीय सत्ता का भवनऔरप्रत्येक मां की मृत्यु परसंतान दृष्टि मेंमर जाता है ईश्वरक्योंकि मां ही ईश्वर का प्रतिबिंब...

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