हम भी सीखेंग अदा अब तो रूठ जाने की,उनको आदत है बहुत हमको भूल जाने की,लो हो गयी न तसल्ली जो दिल ये टूटा है,क्या ज़ुरुरत थी मुहब्बत को आज़माने की
भूमि और भाग्य का
एक ही स्वभाव है..!
जो भी बोया है..
वो निकलना तय है..!!
अगर तलाश करूँ कोई मिल ही जाएगा
मगर तुम्हारी तरह कौन मुझ को चाहेगा।
तुम्हें ज़रूर कोई चाहतों से देखेगा
मगर वो आँखें हमारी कहाँ से लाएगा।
तुम्हारे साथ ये मौसम फ़रिश्तों जैसा है
तुम्हारे बा'द ये मौसम बहुत सताएगा।
बशीर बद्र
ज़हर की ज़रूरत ही ना पड़ी ...
उसके हर पल बदलते बर्ताव ने ही हमें मा^र डाला
जितना आपके लहज़े में सब्र होगा
उतना ही आपकी दुआओं में असर होगा...!