तसल्ली से चाहिए मुझे तुम्हारा साथ , लम्हों में जन्मों की थकान कहाँ उतरती है !!

दिल है बेताब नज़र खोई हुई लगती है, ज़िन्दगी दुख में बहुत रोई हुई लगती है। तिलक राज पारस

किसी की गुलामी से लाख बेहतर हैं, अपनी अपाहिज ज़िंदगी जीना...

भीगे रहे तेरे ख़्यालों में हम बारिश तो थम गई मगर कम्बख़्त ये ख़याल है कि बरसते रहे

हम ही पत्थर के हो गये ये सोचके.. कि ज़िंदगी तो फूल बनेगी नहीं...!!

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