जो कभी साथ बैठ कर हंसे थे
आज नाग बनकर डंस रहे हैं....!!
आपकी नियत तय करती है,
आपकी नियति कैसी होगी....
बर्फ़ से रिश्तों का मौसम गुनगुना हो जाएगा
मिल के आपस में रहें तो ख़ुशनुमा हो जाएगा
बीच की दीवार पहले तुम गिराओ तो सही
देखना आँगन वही फिर दो-गुना हो जाएगा
राघवेंद्र द्विवेदी
वो किसी ताख, पर रखी हुई महंगी गुड़िया..,
मैं उसे दूर से तकता हुआ मुफ़लिस कोई..!!!
जिस तन को छुआ तुने, उस तन को छुपाऊँ
जिस मन को लागे नैना, वो किसको दिखाऊँ..🦋