ओह अच्छा.... तो तुम कह रहे हो के बारिशों का भी मौसम होता है.... मतलब..... तुमने देखा नहीं कभी किसी की आंखों को बरसते...!! वैरागी

जब एक बार जला ली हथेलियां अपनी फिर खुदा ने भी उस हाथ में दिया ना दिया

फासले और बड़ा लो एतराज़ कब किया हमने , तुम भी ना भूल सकोगे वो अंदाज़ हूं मै ..!!

कुछ दरमियाँ नहीं हैं तो बेचैनियाँ है क्यों , कुछ रिश्ते बेरुखी से भी नहीं टूटा करते ..

माँ वो बगीचा है; जिसकी छाँव में ना जाने कितने ही फूल फलते-फूलते हैं।

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