फासले और बड़ा लो एतराज़ कब किया हमने , तुम भी ना भूल सकोगे वो अंदाज़ हूं मै ..!!

कुछ दरमियाँ नहीं हैं तो बेचैनियाँ है क्यों , कुछ रिश्ते बेरुखी से भी नहीं टूटा करते ..

माँ वो बगीचा है; जिसकी छाँव में ना जाने कितने ही फूल फलते-फूलते हैं।

याद करोगे इश्क़ हुआ था,इसकी हर सौग़ात अलग है, मुझसे बेहतर लाख मिलेंगे,लेकिन मेरी बात अलग है.

किस्तों में बिखरीं हँसी देखी है हमनें ज़िंदा रह कर ख़ुदकुशी देखी है....!!

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